लखनऊ, 7 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के लिए शुरू की गई ग्रीन चौपाल अब गांवों में असर दिखाने लगी है। सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के 15 फीसदी क्षेत्र को हरित आवरण से ढकने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में वन विभाग गांव स्तर पर आम लोगों को जोड़ रहा है। प्रदेशभर में विभिन्न विभागों के सहयोग से ग्रामसभाओं में ग्रीन चौपालों का गठन किया जा रहा है। अब तक 14,318 गांवों में ग्रीन चौपाल का आयोजन हो चुका है। इन चौपालों के जरिए ग्रामीणों को पौधरोपण अभियानों से जोड़ा जा रहा है और उन्हें जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं।
ग्रीन चौपाल का संचालन ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रहा है। ग्राम पंचायत सचिव को संयोजक बनाया गया है, जबकि वन विभाग के सेक्शन या बीट अधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी पर खास जोर दिया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी बैठकों में सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक, रैली और गोष्ठियों के जरिए जागरूकता भी फैलाई जा रही है। ग्रीन चौपाल के कामकाज की निगरानी जिला वृक्षारोपण समिति कर रही है और समन्वय की जिम्मेदारी प्रभागीय वनाधिकारी के पास है।
उत्तर प्रदेश वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक रामकुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर गांवों में ग्रीन चौपाल लगाई जा रही हैं। इसका मकसद गांव स्तर पर हरियाली बढ़ाना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण से सीधे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि हर ग्रीन चौपाल की महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य की गई है और अब तक 14,318 गांवों में चौपाल का गठन व आयोजन किया जा चुका है। बेहतर काम करने वाली चौपालों की पहचान भी की जा रही है।






