Uttarakhand

12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल : देहरादून में गरजे ट्रेड यूनियन नेता, सचिवालय कूच का ऐलान

केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का आह्वान, शामिल होंगे उत्तराखंड के कई कर्मचारी संगठन

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 10 फरवरी 2026: 

केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को देशभर में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर होने वाली इस हड़ताल को लेकर उत्तराखण्ड में भी हलचल तेज हो गई है। देहरादून में उत्तराखण्ड संयुक्त ट्रेड यूनियन्स संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से तैयारियां शुरू कर दी हैं। सचिवालय पर रैली व प्रदर्शन का ऐलान किया है।

मंगलवार को हुई बैठक में सीटू, एटक, इंटक, एक्टू समेत कई संगठनों के पदाधिकारियों ने सरकार पर मजदूरों, किसानों और मेहनतकश तबके की उपेक्षा का आरोप लगाया। इंटक के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में श्रमिकों और किसानों का सबसे अधिक शोषण हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार श्रमिक संगठनों से संवाद नहीं कर रही। इससे मजदूरों को हड़ताल जैसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने और हिंसा से दूरी बनाए रखने की अपील की।

सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज ने बताया कि 12 फरवरी को संघर्ष समिति सचिवालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन करेगी। राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि श्रम कानूनों को कमजोर कर जटिल संहिताओं में बदला जा रहा है जिससे मजदूर अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि मौजूदा श्रम नीतियों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए और शोषण बढ़ा है।

हड़ताल की प्रमुख मांगों में 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन तय करना, संविदा श्रमिकों को जॉब की गारंटी देना, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, श्रमिक बस्तियों को मालिकाना हक देना और श्रम कानूनों को सशक्त बनाना शामिल है। आशा वर्कर, स्वास्थ्य कर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चाय बागान श्रमिक, भोजन माता, बैंक व बीमा कर्मी और पथ परिवहन निगम कर्मचारी यूनियन सहित कई संगठन हड़ताल का समर्थन करेंगे।

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