Uttar Pradesh

UP में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे? इस पर संशय गहरा… ये चुनौती बन सकती है बाधा

प्रशासनिक तैयारियों की धीमी रफ्तार और कानूनी औपचारिकताओं के चलते चुनाव टलने की संभावना से नहीं किया जा सकता इनकार

लखनऊ, 13 फरवरी 2026:

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तय समय अप्रैल-मई में होंगे या नहीं? इस पर संशय गहरा गया है। प्रदेश शासन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में समय से चुनाव कराने का भरोसा दिलाया है लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट तस्वीर दिखा रही है। प्रशासनिक तैयारियों की धीमी रफ्तार और कानूनी औपचारिकताओं के चलते चुनाव टलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सबसे बड़ी अड़चन समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है। आयोग बने बिना ओबीसी आरक्षण का वैज्ञानिक आधार तय नहीं हो सकता। सूत्रों के मुताबिक आयोग के गठन के बाद भी सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया तय करने में एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इसके बाद अधिसूचना, आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम सूची जारी करने जैसी औपचारिकताएं अलग से समय मांगेंगी। ऐसे में तय कार्यक्रम के भीतर चुनाव कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर पहले ही यह कह चुके हैं कि चुनाव अप्रैल-मई में ही होंगे लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारियों को लेकर भरोसा कम दिखता है। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार निदेशक पंचायती राज ने 12 जनवरी को हाईकोर्ट में एक पीआईएल के जवाब में हलफनामा दाखिल किया था जिसमें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए फाइल शासन को भेजे जाने की बात कही गई है। शासन स्तर से इस पर निर्णय शीघ्र होने की संभावना है। मगर हलफनामे में चुनाव की तिथियों पर स्पष्टता नहीं है।

आरक्षण तय करने की प्रक्रिया सबसे पेचीदा है। जनगणना 2011 के अनुसार राज्य में अनुसूचित जाति 20.6982 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति 0.5677 प्रतिशत हैं। इसके अनुरूप सीटें आरक्षित करनी होंगी। ओबीसी का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। रैपिड सर्वे 2015 के मुताबिक ग्रामीण आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत बताई गई थी जिसके आधार पर 2021 में आरक्षण तय हुआ था।

इस बार ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य माना जा रहा है। बदली जनसंख्या संरचना और अद्यतन आंकड़ों के हिसाब से नया फार्मूला तय करने में वक्त लगना तय है। कागजों में भरोसे के दावे भले हों लेकिन जमीनी तैयारी को देखते हुए पंचायत चुनाव समय पर होना मुश्किल नजर आ रहा है। सूत्रों का अनुमान है कि एक-दो महीने की देरी लगभग तय मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button