लखनऊ, 17 फरवरी 2026:
यूपी विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी में नौ वर्षों में हुए व्यापक बदलावों की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर लगभग मृतप्राय था। निवेश का माहौल निराशाजनक और युवाओं में हताशा फैली हुई थी लेकिन सरकार की नीतियों और योजनाओं ने प्रदेश को आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) और वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) जैसी पहलों से परंपरागत उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान मिली है। ओडीओपी के तहत हर जनपद के विशिष्ट उत्पादों की ब्रांडिंग, डिजाइन, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग को मजबूत किया गया। इसका असर यह हुआ कि प्रदेश का निर्यात 2017 में करीब 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर आज लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें हस्तशिल्प और परंपरागत उत्पादों की बड़ी हिस्सेदारी है।
इस योजना से 3.16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। आज प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स सक्रिय हैं। ये 3 करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार दे रही हैं। 77 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिलना वैश्विक बाजार में यूपी की पहचान को और मजबूत कर रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले 40 से अधिक जनपदों में आईसीयू जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। आज हर जिले में आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, डायलिसिस, ऑक्सीजन प्लांट और वेंटिलेटर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। AIIMS Gorakhpur और AIIMS Raebareli के संचालन से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिली हैं। टेलीमेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीनोमिक्स और मेडटेक को बढ़ावा देकर भविष्य के लिए स्वास्थ्य इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले हर साल 1200–1500 बच्चों की मौत होती थी जबकि अब मामलों में भारी कमी आई है। 2024 में शून्य मौतें दर्ज की गईं। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के रिस्पांस टाइम में सुधार से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं गांव-गांव तक पहुंची हैं।
फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भी निवेश का माहौल बदला है। ललितपुर में बल्क ड्रग यूनिट्स के साथ फार्मा पार्क और ग्रेटर नोएडा में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किया जा रहा है। हाल ही में लखनऊ में हुए फार्मा कॉन्क्लेव में देश के बड़े निवेशकों ने यूपी की बदली हुई कानून-व्यवस्था और निवेश अनुकूल वातावरण की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक समावेशन पर जोर देते हुए कहा कि वनटांगिया, मुसहर, थारू, कोल और बुक्सा जैसे घुमंतू व जनजातीय समुदायों को पट्टे, आवास और बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, कौशल और नेतृत्व में भागीदारी बढ़ी है। उनका संदेश साफ था कि जहां पहले अंधकार था, आज वहां उम्मीद और प्रगति की रोशनी है। यूपी अब लोकल से ग्लोबल की ओर बढ़ता आत्मनिर्भर प्रदेश बन रहा है।






