Uttar Pradesh

सहकार से समृद्धि की रफ्तार : एम-पैक्स महाअभियान से UP के 54 लाख किसान बने सशक्त

योगी सरकार ने महाअभियान चलाकर सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया फसली ऋण, उन्नत बीज और उर्वरक, गांवों तक पहुंची सस्ती वित्त और डिजिटल सहकारिता, जिला सहकारी बैंकों में दो लाख से अधिक नए खाते खोले गए, 550 करोड़ की राशि खातों में जमा हुई

लखनऊ, 17 फरवरी 2026:

यूपी में सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल रही है। सीएम योगी के नेतृत्व में शुरू किए गए एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान के असर अब जमीन पर साफ दिखने लगे हैं। इस अभियान के जरिए करीब 54 लाख किसान सहकारी ढांचे से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार का फोकस बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (एम-पैक्स) को गांव-गांव तक मजबूत करना है। इससे किसानों को सस्ती वित्तीय सेवाएं और आधुनिक कृषि सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी।

विशेष अभियान के तहत किसानों को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध कराया गया। साथ ही उन्नत गुणवत्ता के बीज और उर्वरक समय पर मिलने से खेती की लागत घटी और उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिली है।वे पहले महंगे निजी ऋण और बिचौलियों पर निर्भर रहते थे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में जिला सहकारी बैंकों में दो लाख से अधिक नए खाते खोले गए हैं। इन खातों में अब तक लगभग 550 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। वहीं, सदस्यों की भागीदारी से 110 करोड़ रुपये की अंश पूंजी जुटाई गई है। इस तरह कुल 660 करोड़ रुपये की राशि सहकारी तंत्र में प्रवाहित होने से गांवों में ऋण प्रवाह बढ़ा और कृषि गतिविधियों को मजबूती मिली है।

सरकार ने सहकारी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए सदस्यता प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब एम-पैक्स से जुड़ने के लिए डिजिटल पोर्टल और मोबाइल आधारित पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। इससे ग्रामीणों को घर के पास ही पंजीकरण और सेवाएं मिल रही हैं। एम-पैक्स पर क्यूआर कोड और यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ी और कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा मिला है।

देश में पहली बार मुख्यमंत्री ने एम-पैक्स का सदस्यता महाअभियान दो चरणों में पहला चरण सितंबर 2023 में और दूसरा चरण सितंबर 2025 में शुरू किया। इन पहलों के जरिए सहकारी समितियों को नई ताकत मिली है। सरकार का मानना है कि सहकारिता के मजबूत नेटवर्क के जरिए सहकार से समृद्धि का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकेगा। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बन सकेगी।

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