Uttar Pradesh

यीडा में सेमीकंडक्टर युग की शुरुआत : जेवर बना देश की पहली DDIC-OSAT यूनिट का ठिकाना

अत्याधुनिक यूनिट के वर्ष 2028 तक परिचालन में आने की उम्मीद, संयंत्र में स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल सिस्टम और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का होगा उत्पादन

लखनऊ/जेवर, 22 फरवरी 2026:

यूपी का यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र का जेवर अब एक उभरते औद्योगिक केंद्र के साथ भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता का नया चेहरा बन गया है। यहां किया गया देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (DDIC) ओसैट यूनिट का शिलान्यास तकनीकी संप्रभुता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस अत्याधुनिक परियोजना को इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड स्थापित कर रही है। यह एचसीएल टेक्नोलॉजीज और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप का संयुक्त उद्यम है।

करीब 3,700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली यह DDIC-OSAT सुविधा वर्ष 2028 तक परिचालन में आने की उम्मीद है। यहां स्मार्टफोन, लैपटॉप, टेलीविजन, ऑटोमोबाइल सिस्टम और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रयुक्त डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का परीक्षण, पैकेजिंग और असेंबलिंग होगी। प्रति माह 20,000 वेफर्स की प्रोसेसिंग क्षमता के साथ यह केंद्र भारत में सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

परियोजना से 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी और वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन से जुड़े भागीदारों का ध्यान जेवर की ओर आकर्षित होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इस निवेश से प्रतिवर्ष लगभग 45,000 करोड़ रुपये के जीडीपी योगदान का अनुमान है। ये उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र पहले से लॉजिस्टिक्स और एयरोस्पेस निवेश के लिए जाना जाता रहा है। अब सेमीकंडक्टर उद्योग के प्रवेश से यह इलाका हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में उभरने को तैयार है। परियोजना के तहत उत्कृष्टता केंद्र, अनुसंधान प्रयोगशालाएं और सिमुलेशन लैब स्थापित की जाएंगी। स्थानीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे युवाओं को चिप डिजाइन और परीक्षण जैसे उन्नत क्षेत्रों में अवसर मिलेंगे।

यह पहल मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को जमीन पर उतारने का ठोस उदाहरण है। सामरिक दृष्टि से भी सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका को मजबूत करेगी। विकसित भारत 2047 के सपने की ओर बढ़ते देश के लिए जेवर का यह शिलान्यास तकनीकी स्वाभिमान और औद्योगिक आत्मविश्वास का नया प्रतीक बनकर उभरा है।

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