लखनऊ, 26 फरवरी 2026:
यूपी में जिला पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की पहल रंग ला रही है। ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को अनिवार्य, पारदर्शी और सख्त बनाए जाने से अवैध निर्माण पर अंकुश लगने के साथ पंचायतों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सीएम योगी के निर्देशों पर लागू की गई इस व्यवस्था से 2025 से जनवरी 2026 तक जिला पंचायतों ने 2,883 मानचित्र स्वीकृत किए। इससे करीब 57.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
पहले बड़ी संख्या में लोग बिना स्वीकृति के भवन निर्माण करा लेते थे जिससे न तो नियोजन का पालन हो पाता था और न ही पंचायतों को राजस्व मिलता था। अब ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से मानचित्र स्वीकृति की सुविधा उपलब्ध होने से प्रक्रिया सरल और तेज हो गई है। डिजिटल सिस्टम अपनाने से आवेदन की ट्रैकिंग संभव हुई है। इससे आवेदक घर बैठे अपने प्रकरण की स्थिति देख पा रहे हैं। इससे स्वीकृति में लगने वाला समय घटा है और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों में भी कमी आई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े अस्पताल, शॉपिंग मॉल और स्टेडियम जैसी परियोजनाओं के विस्तार के साथ मानचित्र स्वीकृति के माध्यम से जिला पंचायतों को नियमित आय मिल रही है। मानचित्र स्वीकृति शुल्क, विकास शुल्क और अन्य प्रभारों से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व को सड़कों के निर्माण, नाली व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है। इससे गांवों की आधारभूत संरचना मजबूत हो रही है और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जिला पंचायतें अपने संसाधनों को सुदृढ़ कर आत्मनिर्भर बनें। मानचित्र स्वीकृति से बढ़ी आय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इससे न केवल स्थानीय निकायों को वित्तीय मजबूती मिल रही है बल्कि ग्रामीण विकास की रफ्तार भी तेज हो रही है।






