बाराबंकी, 1 मार्च 2026:
सात साल की मासूम वैष्णवी की मौत के बाद जब उसकी अर्थी घर पहुंची तो पूरा गांव गम में डूब गया। जिस बेटी के साथ कुछ दिन बाद रंग खेलने की तैयारी थी, उसी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इससे पहले बदहवास मां उसे ले जाने से पहले अबीर गुलाल लगाकर चीखती रही। हर आंख नम थी लेकिन कोई उसे दिलासा देने का साहस जुटा नहीं पा रहा था।
मामला बदोसराय थाना क्षेत्र में कोटवाधाम इलाके का है। राजू गुप्ता की पौत्री व संजय और गीता गुप्ता की सात साल की बेटी वैष्णवी कक्षा दो की छात्रा थी। 22 फरवरी की सुबह वह गांव में ही शिवप्रसाद गुप्ता की दुकान पर मैगी लेने गई थी। दुकान पर खोया बनाने का काम भी चल रहा था, जिसके चलते वहां खौलते पानी के बड़े भगोने रखे थे। मैगी पकड़ते समय अचानक संतुलन बिगड़ गया और बच्ची खौलते पानी से भरे भगोने में गिर गई। हादसे में वह करीब 60 प्रतिशत तक झुलस गई। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे

पहले जिला अस्पताल और फिर हालत गंभीर होने पर लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां आईसीयू में उसका इलाज चल रहा था। एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद शनिवार को उसकी मौत हो गई। गांव पहुंचने पर परिवार ने बेटी को आखिरी विदाई से पहले अबीर और गुलाल लगाया। मां निस्तेज पड़ी बेटी का चेहरा चूमती रही। उसे उसकी पसंद की चीजें खिलाती रही। किसी ने मिठाई खिलाने की कोशिश की तो कहा मेरे बाबू को मिठाई पसंद नहीं थी। मां गीता गुप्ता का रो-रोकर कांपती आवाज में वह कहती रहीं कि ऊपर बेटी का कमरा है, लेकिन उसे खोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। कमरा अब भी वैसा ही है, खिलौनों और रंगीन कपड़ों से भरा हुआ। मां बार-बार यही कहती रही कि इस बार होली में बेटी खूब रंग खेलने वाली थी।
अधूरी रह गई होली की खुशियों के बीच जब मासूम की अंतिम यात्रा निकली तो माहौल सिसकियों से भर गया। गांववालों के लिए वैष्णवी सिर्फ एक बच्ची नहीं, सबकी प्यारी थी। हंसमुख स्वभाव और सब से घुलने-मिलने वाली इस बच्ची की कमी हर किसी को खल रही है। इसी का असर था भारी संख्या में महिलाएं उसे अंतिम बार देखने आईं थी और उनसे कहीं अधिक तादाद में ग्रामीण जमा थे। इस मामले में वैष्णवी के दादा ने शिव प्रसाद गुप्ता पर लापरवाही बरतने व धमकी देने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इस वजह से आज अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा।






