बाराबंकी 1 मार्च 2026:
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर सामने आते ही सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव में गम का माहौल छा गया। गांव के लोग इस खबर से मायूस नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि खामेनेई के परिवार की जड़ें कभी इसी अवधी क्षेत्र से जुड़ी रही हैं, इसलिए यहां के लोगों में खास भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया जाता है।
ईरान के सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई की मौत के बाद बाराबंकी की तहसील सिरौलीगौसपुर का किंतूर गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ख़ामेनेई परिवार के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से माना जाता है। बताया जाता है कि कई पीढ़ियां पहले परिवार के लोग यहां से ईरान के निशापुर इलाके में जाकर बस गए थे। जानकारों के मुताबिक ख़ामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसवी का संबंध किंतूर से था।
1830 के आसपास वह अवध से कर्बला जियारत पर गए और बाद में ईरान के खुमैनी शहर में बस गए। इसी शहर के नाम पर आगे चलकर परिवार को खुमैनी कहा जाने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, कभी किंतूर में इस खानदान के करीब 550 घर हुआ करते थे, जिन्हें सैयदवाड़ा के नाम से जाना जाता था। समय के साथ अधिकांश परिवार अन्य जगहों पर बस गए और अब यहां कुछ ही घर बचे हैं, लेकिन इस वंश का नाम आज भी इलाके में अदब के साथ लिया जाता है।
रविवार तड़के जैसे ही ख़ामेनेई के निधन की सूचना गांव पहुंची, लोग स्तब्ध रह गए। कई परिवारों ने दुख जताते हुए ईरान में रह रहे आम नागरिकों और भारतीयों की सलामती के लिए दुआ की। गांव में दिनभर इस खबर की चर्चा होती रही। स्थानीय निवासी आदिल व निहाल काजमी ने कहा कि सुप्रीम लीडर के इंतकाल की खबर से सभी लोग गमजदा हैं। उन्होंने ईरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे इंसानियत के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि मौजूदा हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं और सबसे जरूरी वहां के लोगों की सुरक्षा है।






