बाराबंकी, 2 मार्च 2026:
सफेदाबाद स्थित हिंद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में ट्रस्ट प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद खुलकर सामने आ गया है। कॉलेज परिसर के गेट पर चेयरपर्सन डॉ. ऋचा मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष डॉ. आमोद कुमार सचान को मुख्य गेट पर रोकने के बाद एंट्री तो मिल गई लेकिन आरोप प्रत्यारोप से विवाद और गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दर्ज एफआईआर, पदाधिकारियों को हटाने के फैसले और प्रबंधन अधिकारों के दावों ने नई बहस छेड़ दी है।
बृज किशोर सिंह की शिकायत से शुरू हुआ नया विवाद
दरअसल ट्रस्टी बहराइच रायपुर राजा निवासी डॉ. बृज किशोर सिंह ने कोर्ट के आदेश पर 4 फरवरी को लखनऊ कैसरबाग कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004 में स्थापित हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट के मूल दस्तावेजों में कथित रूप से बदलाव कर ट्रस्ट की संरचना बदली गई। शिकायत में कहा गया कि ट्रस्ट डीड में कूटरचना कर कुछ लोगों ने अपने नाम पदों पर दर्ज करा लिए और ट्रस्ट के नाम पर बैंक खातों का संचालन किया। मामले की जांच की मांग की गई है। वित्तीय धांधली का आरोप चेयरमैन डॉ. सचान पर लगा।
सचान और ऋचा मिश्रा ने आरोपों को बताया निराधार
इधर संस्थान में प्रशासनिक एवं चिकित्सकीय कार्यप्रणाली प्रभावित होने व अव्यवस्था उत्पन्न होने पर 22 फरवरी को वरुण श्रीवास्तव, बृज किशोर सिंह, डा. रणविजय सिंह, मानवेंद्र सिंह व सरोजनी वर्मा के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवाया गया। एक दिन पूर्व परिसर में चेयरपर्सन को गेट पर रोकने के बाद हंगामा खड़ा हुआ। सूचना मिलने पर उपजिलाधिकारी आनंद तिवारी और क्षेत्राधिकारी संगम कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर माहौल शांत कराया। कुछ समय के व्यवधान के बाद अस्पताल और शैक्षणिक कार्य फिर से शुरू हो सका।
वहीं एंट्री मिलने पर डॉ. अमोद कुमार सचान और डॉ. ऋचा मिश्रा ने प्रेस वार्ता में सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि हिंद मेडिकल कॉलेज एक वैध ट्रस्ट के अधीन संचालित संस्था है, जिसमें शुरुआत में सात ट्रस्टी थे। समय के साथ कुछ सदस्यों के निधन और बदलाव के बाद वर्तमान में सीमित ट्रस्टी ही वैधानिक रूप से बचे हैं। डॉ. ऋचा मिश्रा के अनुसार कुछ लोगों ने साजिश के तहत अनधिकृत बैठक दिखाकर पुरानी कमेटी को भंग करने और खुद को अध्यक्ष व पदाधिकारी घोषित करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के मूल दस्तावेजों और प्रशासनिक रिकॉर्ड पर कब्जा करने की कोशिश की गई और संस्थान में जबरन हस्तक्षेप किया गया।
डॉ. अमोद सचान ने कहा कि जो लोग आज खुद को प्रबंधन का प्रमुख बता रहे हैं, वे नियमों के विरुद्ध संस्थान पर कब्जा करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्हें अपने ही संस्थान में प्रवेश से रोकने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि संस्थान की व्यवस्था और चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने लगी थीं, इसलिए ट्रस्ट की बैठक कर चार पदाधिकारियों को कार्यमुक्त किया गया।
चार पदाधिकारी किए गए कार्यमुक्त
सचान पक्ष के अनुसार वाइस चेयरमैन वरुण श्रीवास्तव, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मानवेंद्र सिंह, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. रणविजय सिंह और एचआर मैनेजर दीप्ति सिंह को पद से हटाया गया है। हालांकि दूसरे पक्ष ने इस निर्णय को अवैध बताया है।
लगातार चल रहे विवाद से कॉलेज परिसर में पढ़ने वाले छात्रों और इलाज कराने आए मरीजों के बीच भी असमंजस बना रहा। फिलहाल मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






