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गोमाता के आशीर्वाद से रंगी होली : UP में ऑर्गेनिक गुलाल से नारी सशक्तिकरण और रोजगार की नई उड़ान

देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बना गुलाल, बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई, मुरादाबाद समेत तमाम जिलों में किया जा रहा है तैयार

लखनऊ, 3 मार्च 2026:

यूपी में इस बार होली रंगों का पर्व के साथ गोसेवा, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का उत्सव बन गई है। योगी सरकार की पहल पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों से पारंपरिक ऑर्गेनिक गुलाल तैयार किया जा रहा है। यह गुलाल त्वचा के लिए सुरक्षित होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन रहा है।

राज्य गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस अनूठी योजना के तहत ग्रामीण महिलाएं गोशाला संचालकों के सहयोग से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर गुलाल बना रही हैं। इसमें देशी गाय के गोबर के कंडों की राख के साथ गुलाब की पंखुड़ियां, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियां और इंडिगो (नील) जैसे तत्वों का प्रयोग किया जा रहा है। बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंगों के विपरीत यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और त्वचा के लिए सुरक्षित है।

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इस पहल की सबसे खास बात है गोबर के कंडों की राख का उपयोग। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख में क्षारीय तत्व पाए जाते हैं, जो नमी कम कर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने में सहायक होते हैं। वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्करण के बाद यही राख गुलाल को मुलायम आधार देती है, जिससे रंगों का फैलाव बेहतर होता है और किसी कृत्रिम फिलर की आवश्यकता नहीं पड़ती।

यह योजना बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रही है। स्थानीय गोशालाओं से प्राप्त सामग्री के उपयोग से गोवंश संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वावलंबन का यह संगम उत्तर प्रदेश की होली को इस बार खास बना रहा है।

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