लखनऊ, 7 मार्च 2026:
यूपी सरकार की महत्वाकांक्षी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। एयरपोर्ट को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) की ओर से सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस मिल गया है। इस अहम मंजूरी के साथ ही अब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से एयरोड्रम लाइसेंस मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इसके बाद यहां से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू किया जा सकेगा।
प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली इस परियोजना को सीएम योगी के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ाया गया है। सरकार का लक्ष्य जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई गति देगा।
यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि किसी भी एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों का परीक्षण अनिवार्य होता है। इसी प्रक्रिया के तहत बीसीएएस की विशेषज्ञ टीम ने एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस दौरान निगरानी प्रणाली, एक्सेस कंट्रोल, यात्रियों और कार्गो की जांच व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की गई। सभी मानकों के अनुरूप व्यवस्था मिलने के बाद एयरपोर्ट को सिक्योरिटी वेटिंग अप्रूवल प्रदान किया गया।
सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस का मतलब है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा प्रणाली उड़ान संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानी गई है। इसके बाद अगला चरण डीजीसीए द्वारा एयरोड्रम लाइसेंस जारी करने का होता है। यह लाइसेंस मिलने के बाद ही किसी एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन संभव हो पाता है। प्रदेश सरकार जेवर एयरपोर्ट को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में विकसित कर रही है। यह एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक प्रमुख एविएशन हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट शुरू होने से प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूरी तरह विकसित होने के बाद यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा। प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। यह परियोजना यूपी को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।






