श्रीकांत उपाध्याय
वाराणसी, 11 मार्च 2026:
गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के मुद्दे पर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच काशी के संतों ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। लखनऊ से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शंखनाद से पहले ही वाराणसी के संतों ने उनके खिलाफ शंखनाद कर दिया।
वाराणसी स्थित पातालपुरी मठ में आयोजित बैठक में वैष्णव विरक्ति संत समाज और रामानंद सम्प्रदाय के कई प्रमुख संत शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य ने की। इस दौरान संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।
बालक देवाचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश वह राज्य है जहां गाएं सबसे अधिक सुरक्षित हैं, ऐसे में गोरक्षा के नाम पर आंदोलन खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा कर रहे हैं और यह सब राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वह इंडिया गठबंधन के पक्ष में एक औजार की तरह काम कर रहे हैं। योगी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। बालक देवाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद सनातन परंपरा को पंथ और सम्प्रदायों में बांटने का प्रयास कर रहे हैं।
बैठक में मौजूद संतों ने रामानंद सम्प्रदाय पर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। संतों का कहना था कि किसी भी प्रमुख पंथ या सम्प्रदाय का समर्थन अविमुक्तेश्वरानंद को प्राप्त नहीं है। बैठक के अंत में कई संतों की मौजूदगी में शंख बजाकर उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। संतों ने स्पष्ट किया कि काशी की धार्मिक परंपराओं और संत समाज के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।






