लखनऊ, 19 अप्रैल 2026:
यूपी के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके लिए जनपद हरदोई में 29 अप्रैल को पीएम का कार्यक्रम प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इसका सीधा लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा। सीएम योगी के नेतृत्व में राज्य में तेजी से विकसित हो रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गंगा एक्सप्रेसवे एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है।
वर्ष 2020 में मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता पर आगे बढ़ाया गया और रिकॉर्ड समय में इसे साकार किया गया। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा। यह मार्ग पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को सीधे जोड़ते हुए यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा।
इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 प्रमुख जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में वर्तमान में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है। यह गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद करीब 60 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी। इससे उद्योगों और व्यापार को बड़ा फायदा होगा। यह परियोजना एक औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होकर निवेश आकर्षित करेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।
किसानों के लिए भी यह एक्सप्रेसवे वरदान साबित होगा। कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे जिससे उनकी गुणवत्ता और कीमत दोनों में सुधार होगा। इसके अलावा प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला इंजन है। यह राज्य को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।






