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सिंचाई: एक बूंद पानी नहीं होगा बेकार…इन जिलों में 111 करोड़ की प्रेशर परियोजनाएं सींचेंगीं खेत

पूर्वांचल के तीन जिलों में नई तकनीक से 4405 हेक्टेयर जमीन को मिलेगा पानी, 57 गांवों के किसानों को होगा सीधा फायदा

लखनऊ, 12 मार्च 2026:

पूर्वांचल के कई इलाकों में पानी की कमी के बीच खेती को सहारा देने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने बड़ी पहल शुरू की है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में आधुनिक प्रेशर सिंचाई प्रणाली की सात परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन योजनाओं के जरिए कम पानी में भी खेतों तक सिंचाई पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को फसल के समय पानी के लिए जूझना न पड़े।

विभाग के मुताबिक करीब 111.62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इन सात परियोजनाओं से करीब 4405 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा इन तीन जिलों के लगभग 57 गांवों के किसानों को मिलेगा। नई तकनीक से पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और खेतों तक सप्लाई भी आसान होगी।

सिद्धार्थनगर में पड़रिया प्रेशर सिंचाई प्रणाली परियोजना का काम पूरा हो चुका है। इसके तहत करीब 3.6 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली बनाई गई है, जिससे जिले के करीब 454 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ी है। वहीं सिद्धार्थनगर और महाराजगंज की सीमा पर स्थित कैम्पियरगंज शाखा पर भी प्रेशर सिंचाई परियोजना का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। इसके शुरू होने के बाद करीब 600 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा और आसपास के नौ गांवों के किसानों को सीधी राहत मिलेगी।

महाराजगंज जिले में मैहनवा, बृजमनगंज और फरेंदा रजवाहा पर भी प्रेशर सिंचाई प्रणाली विकसित की जा रही है। इन परियोजनाओं का अधिकांश काम अंतिम चरण में है। इसी कड़ी में गोरखपुर के बैकुंठपुर रजवाहा पर 4.6 किलोमीटर लंबी प्रेशर सिंचाई वितरण प्रणाली तैयार की जा रही है। इसके पूरा होने पर जिले के करीब 10 गांवों को फायदा होगा और लगभग 690 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई आसान हो जाएगी।

प्रेशर सिंचाई प्रणाली की खासियत यह है कि इसमें पानी का नुकसान कम होता है और कम उपलब्धता वाले इलाकों में भी खेतों तक पानी पहुंचाया जा सकता है। इससे किसानों को रबी और खरीफ दोनों मौसम में बेहतर सिंचाई मिल सकेगी। विभाग का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से इलाके में खेती की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आमदनी पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

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