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स्टाम्प विभाग की मुहिम : अपंजीकृत संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर जोर…अभियान में भारी राजस्व मिलने का अनुमान

सर्किल दरों का नया सर्वे जारी, टोल प्लाजा और विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं से भी वसूली तेज

लखनऊ, 12 मार्च 2026:

प्रदेश में राजस्व बढ़ाने और संपत्ति से जुड़े लेनदेन को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए स्टाम्प एवं निबंधन विभाग ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विभाग अपंजीकृत संपत्तियों के पंजीकरण, लंबित स्टाम्प मामलों के निस्तारण और विभिन्न संस्थाओं से बकाया स्टाम्प शुल्क की वसूली पर खास फोकस कर रहा है। अभियान का मकसद राजस्व में इजाफा करने के साथ संपत्ति के सौदों को ज्यादा साफ और व्यवस्थित बनाना है।

स्टाम्प दरों का हो रहा व्यापक सर्वे

प्रदेश के विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी और अन्य संस्थाओं से जुड़ी अपंजीकृत संपत्तियों का पंजीकरण कराया जा रहा है। साथ ही इन एजेंसियों से जुड़े समझौतों और परियोजनाओं की भी समीक्षा की जा रही है ताकि तय स्टाम्प शुल्क समय पर जमा हो सके।

इसी के साथ स्टाम्प दरों का बड़ा सर्वे भी कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य संपत्तियों की मौजूदा और वास्तविक न्यूनतम बाजार दरों को सर्किल रेट सूची में शामिल करना है, जिससे राजस्व वसूली में पारदर्शिता आए और दरें बाजार की स्थिति के हिसाब से तय हो सकें। सर्किल दर सूची के सरलीकरण और मानकीकरण का प्रारूप पहले ही जारी किया जा चुका है।

कई परियोजनाओं से राजस्व बढ़ने की उम्मीद

राजस्व बढ़ाने के लिए अलग-अलग जिलों में विशेष कार्ययोजनाएं भी तैयार की गई हैं। मुरादाबाद में एमडीए की सहायक और गोविंदपुरम आवासीय योजनाओं से करीब 22 करोड़ रुपये, वाराणसी में वीडीए की गंजारी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से लगभग 40 करोड़ रुपये और गोरखपुर में जीडीए की न्यू टाउनशिप योजना से करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जीआईडीए के लीज और फ्रीहोल्ड विलेखों से करीब 50 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। इन सभी स्रोतों से मार्च 2026 तक लगभग 200 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद बताई जा रही है।

टोल प्लाजा समझौतों की भी हो रही जांच

एनएचएआई से जुड़े टोल प्लाजा मामलों की भी गहन समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में एनएचएआई के 123 टोल प्लाजा और संबंधित एजेंसियों के बीच हुए समझौतों की जांच में करीब 72 करोड़ रुपये की स्टाम्प देयता तय की गई है। इन मामलों को लेकर अलग-अलग अदालतों में वाद दाखिल किए गए हैं और वसूली की कार्रवाई जारी है। गाजियाबाद में एक मामले का निस्तारण करते हुए करीब 70 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि कुशीनगर में दो मामलों में करीब 52 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया चल रही है।

नोएडा, मेरठ समेत कई जिलों में बड़ी वसूली की तैयारी

प्रदेश के कई जिलों में विकास प्राधिकरणों और निजी कॉलोनाइजरों की अपंजीकृत संपत्तियों का पंजीकरण कराकर भी राजस्व बढ़ाने की योजना बनाई गई है। गौतमबुद्धनगर में यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े मामलों से करीब 93 करोड़ रुपये की आय की संभावना है।

मेरठ में निजी बिल्डरों की अपंजीकृत संपत्तियों और आरआरटीएस परियोजना से करीब 252 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान है। वहीं गाजियाबाद में जीडीए की हरनंदीपुरम आवासीय योजना और यूपीएसआईडीसी की मोदीनगर परियोजना से लगभग 153 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद है। इसी तरह बरेली में बीडीए की पीलीभीत आवासीय योजना से करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है। विभाग का मानना है कि इन कदमों से राजस्व संग्रह में तेजी आएगी और संपत्ति पंजीकरण की व्यवस्था ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी।

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