लखनऊ, 13 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में जाली मार्कशीट के सहारे फार्मासिस्ट बनने और पंजीकरण कराने का मामला सामने आया है। दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद गाजीपुर थाने में 139 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
फार्मेसी काउंसिल के अनुसार, 65 लोगों ने जाली मार्कशीट के आधार पर फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण करा लिया था। इसके अलावा 74 अभ्यर्थियों ने डीफार्मा की संदिग्ध मार्कशीट लगाकर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। काउंसिल ने जब दस्तावेजों की पुष्टि कराई तो कई प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।
इंदिरानगर स्थित उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि काउंसिल डिप्लोमा और डिग्री धारक फार्मेसी छात्रों का पंजीकरण करती है। संदेह होने पर 74 अभ्यर्थियों और 40 पंजीकृत फार्मासिस्टों के अभिलेखों की दोबारा जांच कराई गई। इसके लिए 31 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद से पत्राचार किया गया था।
परिषद से प्राप्त अभिलेखों की जांच में सामने आया कि 74 में से 65 फार्मासिस्टों और 40 में से 37 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान जाली दस्तावेज अपलोड किए थे। इसके अलावा मध्यप्रदेश के कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर की फर्जी मार्कशीट लगाकर 37 अन्य अभ्यर्थियों ने भी पंजीकरण कराया था।
मामला सामने आने के बाद फार्मेसी काउंसिल ने इसकी रिपोर्ट प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं परिवार कल्याण, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भेजी। इसके बाद रजिस्ट्रार की तहरीर पर गाजीपुर थाने में 139 लोगों के खिलाफ जाली दस्तावेज के आधार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।






