लखनऊ, 19 मार्च 2026:
प्रदेश में अपराध के बदलते तौर-तरीकों पर लगाम लगाने के लिए सरकार फॉरेंसिक सिस्टम को और मजबूत करने जा रही है। इसके तहत यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज में पांच नई आधुनिक लैब स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
नई लैब्स के शुरू होने के बाद केसों की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और साक्ष्य के आधार पर मामलों को मजबूत तरीके से अदालत में पेश किया जा सकेगा। इससे फायदा ये होगा कि अपराधी किसी सूरत में बच नहीं पायेगा। इन लैब्स में क्वांटम कंप्यूटिंग, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो, 3-डी प्रिंटिंग, एससीएडीए और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनके जरिए न सिर्फ छात्रों को आधुनिक जांच तकनीक सिखाई जाएगी, बल्कि पुलिस और जांच एजेंसियों को भी अपराध की नई चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत इन लैब्स की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। क्वांटम कंप्यूटिंग लैब के जरिए जटिल डाटा एनालिसिस और एन्क्रिप्शन से जुड़े मामलों को तेजी से सुलझाया जा सकेगा, जो साइबर अपराध की जांच में अहम साबित होगा। चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब उन मामलों में काम आएगी, जहां ऑडियो या वीडियो की गुणवत्ता खराब होती है। यहां ऐसे साक्ष्यों को क्लियर कर जांच में इस्तेमाल लायक बनाया जाएगा।
3-डी प्रिंटिंग लैब के जरिए अपराध स्थल के मॉडल तैयार किए जा सकेंगे। हथियारों के नमूने बनाए जाएंगे और घटनाओं को दोबारा तैयार कर समझा जा सकेगा, जिससे अदालत में साक्ष्य पेश करना आसान होगा। एससीएडीए लैब आईटी और ओटी सिक्योरिटी से जुड़े मामलों की जांच में मदद करेगी। खासतौर पर औद्योगिक संस्थानों या अहम ढांचे पर साइबर हमलों की पड़ताल में इसका उपयोग होगा। डिजिटल फॉरेंसिक लैब में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों से डाटा रिकवरी और उसका विश्लेषण किया जाएगा। इससे साइबर क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों की जांच और मजबूत होगी।
फिलहाल इंस्टीट्यूट में एडवांस्ड साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग, एआई-ड्रोन और रोबोटिक्स, डॉक्यूमेंट एग्जामिनेशन और इंस्ट्रूमेंटेशन जैसी लैब्स पहले से संचालित हैं। नई लैब्स जुड़ने के बाद जांच की क्षमता और दायरा दोनों बढ़ेंगे। सरकार पिछले कुछ समय से फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर काम कर रही है। पुलिस और जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित जांच के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे मामलों की पड़ताल ज्यादा सटीक हो सके।






