लखनऊ, 20 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश पिछले 9 वर्षों में निवेश और औद्योगिक विकास के मामले में देश में एक अलग पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र ने प्रदेश को निवेश के नक्शे पर एक मजबूत स्थान दिलाया है। अब तक चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए लगभग ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है। इसी कड़ी में ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी चल रही है।
2017 में योगी सरकार के कार्यभार संभालने के बाद निवेश व उद्यमिता के मोर्चे पर पिछड़े प्रदेश में योजनाबद्ध सुधार किए गए। सबसे पहले सिस्टम सुधार (रिफॉर्म) किया गया, फिर नीतियों को जमीन पर उतारने के लिए परफॉर्मेंस बढ़ाया गया और अंत में ट्रांसफॉर्म के जरिए प्रदेश की छवि बदली गई। निवेश प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनाई गई। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 13 अधिनियमों में 99% छोटे आपराधिक प्रावधान हटाए गए, जिससे कारोबार आसान हुआ।
निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का तेजी से विकास किया गया। उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और डि-रेगुलेशन सुधार लागू किए गए। इसके नतीजे के तौर पर यूपी को ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। प्रदेश में सेक्टरवार औद्योगिक क्षेत्रों का विकास भी किया गया। फिल्म सिटी, टॉय पार्क, लॉजिस्टिक हब (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र), फार्मा पार्क (झांसी-ललितपुर), मेगा टेक्सटाइल पार्क (लखनऊ-हरदोई), परफ्यूम पार्क (कन्नौज), प्लास्टिक, गारमेंट और लेदर क्लस्टर (गोरखपुर, कानपुर, हरदोई) निवेशकों को आकर्षित करने का माध्यम बन रहे हैं।
उत्तर प्रदेश अब 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाईटेक सेक्टर जैसे एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण में निवेश के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से निवेश की गति और बढ़ रही है। यूपी की यह कहानी महज सुधार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि व्यापक आर्थिक परिवर्तन और निवेश के लिए आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो चुकी है।






