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मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ तक : अमरोहा की अनीता बनीं 4400 महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी, आज हर महीने 45 हजार तक की आमदनी, गांव की महिलाओं को दिखा रहीं आत्मनिर्भरता का रास्ता

लखनऊ, 24 मार्च 2026:

यूपी के अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र के सलेमपुर गोसाईं गांव की रहने वाली अनीता देवी आत्मनिर्भर भारत की सशक्त तस्वीर बन चुकी हैं। कभी पति के साथ मजदूरी कर परिवार चलाने वाली अनीता आज लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं। वह हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

एक समय ऐसा था जब अनीता देवी के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। रोज का जीवन संघर्षों से भरा होता था। परिवार की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था लेकिन उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस पहल ने उन्हें आर्थिक सहयोग देने के साथ आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान किया।

योगी सरकार के सहयोग से वर्ष 2021 में अनीता को सामुदायिक निवेश निधि के तहत 1.10 लाख रुपये मिले। इससे उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय की शुरुआत की। इसके बाद 2023 में 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड, 2024 में 3 लाख रुपये और 2025 में 4 लाख रुपये का कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मिला। इस वित्तीय सहयोग ने उनके सपनों को उड़ान दी।

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अनीता ने अपने घर से सिलाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे इसे व्यवसाय का रूप दे दिया। कोरोना काल में उनके समूह ने मास्क और अन्य उत्पाद बनाकर अच्छी आमदनी की। उनकी मेहनत रंग लाई और आय के नए रास्ते खुलते गए। दिसंबर 2023 में उन्होंने शक्ति ट्रेडर्स के नाम से किराना दुकान भी खोली जिसे उनके पति और बेटा मिलकर संभालते हैं।

आज अनीता देवी की मासिक आय 40 से 45 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। वे समय मिलने पर कॉस्मेटिक उत्पादों का भी व्यवसाय करती हैं। सबसे खास बात यह है कि अनीता ने अपने गांव में 27 स्वयं सहायता समूह बनाए हैं। इनसे करीब 4400 महिलाएं जुड़ी और आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

अनीता देवी की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ यह बताती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं और सामूहिक प्रयास से महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव संभव है। आज वे न सिर्फ अपने परिवार का सहारा हैं बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वे अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। अनीता कहती हैं कि आत्मनिर्भरता ही सच्चा सम्मान दिलाती है।

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