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यूपी के कॉलेजों में बदला माहौल… ‘कल्चरल क्लब’ ने दिया नया मंच, युवा बन रहे ‘कल्चरल एम्बेसडर’

250 कॉलेजों में शुरू हुई पहल, 1.25 करोड़ की मदद से पढ़ाई के साथ हुनर को भी मिल रही पहचान

लखनऊ, 23 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश में अब कॉलेजों का माहौल धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को उनकी संस्कृति और हुनर से जोड़ने की कोशिश तेज हुई है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने राजकीय और सहायता प्राप्त कॉलेजों में ‘कल्चरल क्लब’ की शुरुआत की है, जो अब छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

सरकार की कोशिश है कि कॉलेज सिर्फ पढ़ाई के केंद्र न रहकर ऐसे स्थान बनें, जहां से जागरूक, जिम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से मजबूत युवा निकलें। वो कल्चरल एम्बेसडर बनें। इस पहल के तहत अब तक 250 से ज्यादा कॉलेजों को जोड़ा जा चुका है। इनमें 117 राजकीय और 145 एडेड कॉलेज शामिल हैं। इन क्लबों को मजबूत बनाने के लिए करीब 1.25 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई है। मकसद साफ है, युवाओं को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें अपनी जड़ों और पहचान से जोड़ना।

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कॉलेजों में बने ये क्लब अब छात्रों के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गए हैं, जहां वे खुलकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। वाद-विवाद, भाषण, कविता और कहानी लेखन जैसी गतिविधियों के साथ-साथ नृत्य और संगीत के कार्यक्रम भी हो रहे हैं। लोकनृत्य, शास्त्रीय प्रस्तुतियां, भजन और कव्वाली तक में छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

कला के क्षेत्र में भी छात्रों का उत्साह देखने लायक है। रंगोली, मेहंदी, पोस्टर, स्लोगन और पेंटिंग जैसी गतिविधियां कैंपस में रौनक बढ़ा रही हैं। इससे न सिर्फ उनका हुनर सामने आ रहा है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

इन क्लबों का एक बड़ा असर कॉलेजों के माहौल पर भी पड़ा है। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र एक साथ आ रहे हैं, एक-दूसरे की संस्कृति को समझ रहे हैं और आपसी तालमेल बेहतर हो रहा है। कैंपस में अब पहले के मुकाबले ज्यादा रचनात्मक और सकारात्मक माहौल नजर आ रहा है।

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यह पहल सिर्फ कॉलेज तक सीमित नहीं है। छात्र अब कैंपस से बाहर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। धरोहर भ्रमण, पदयात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए वे समाज से जुड़ रहे हैं और जमीनी अनुभव हासिल कर रहे हैं। त्योहारों और मेलों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है, जिससे सांस्कृतिक माहौल और मजबूत हो रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि आज के युवाओं को सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ना भी उतना ही जरूरी है। कल्चरल क्लब इसी सोच का नतीजा हैं, जो छात्रों को अपनी पहचान समझने और उसे आगे बढ़ाने का मौका दे रहे हैं।

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