Uttar Pradesh

‘ग्रेवयार्ड’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ तक : 9 साल में बदली UP की तस्वीर, आस्था बनी विकास का इंजन

योगी सरकार के दौर में तीर्थ, पर्यटन और संस्कृति का संगम, वर्ष 2025 में आए 1.56 अरब पर्यटक, ₹36 हजार करोड़ निवेश और लाखों रोजगार का रास्ता तैयार, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी

लखनऊ, 25 मार्च 2026:

यूपी में नौ वर्षों के दौरान पर्यटन क्षेत्र ने एक बड़ी वैचारिक और संरचनात्मक छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ की पुरानी छवि से निकलकर ‘टेंपल इकोनॉमी’ के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित की है। यह बदलाव सिर्फ सोच का नहीं बल्कि शासन की प्राथमिकताओं में आए व्यापक परिवर्तन का परिणाम है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि 2017 से पहले जहां बजट का बड़ा हिस्सा कब्रिस्तानों की दीवारों पर खर्च होता था वहीं अब सरकार ने तीर्थ स्थलों, धार्मिक कॉरिडोर, सांस्कृतिक मार्गों और पर्यटन अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी है। इससे सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होने के साथ इसे आर्थिक विकास से भी जोड़ा गया है।

अयोध्या, काशी, प्रयागराज और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ मीरजापुर, चित्रकूट, नैमिषारण्य और मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ जैसे तीर्थ अब यूपी के पर्यटन की नई पहचान बन चुके हैं। खासतौर पर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। अयोध्या में 2025 के दौरान करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

राज्य में आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक स्तर पर यूपी की पहचान को मजबूत किया है। अयोध्या का दीपोत्सव 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बना चुका है। वाराणसी की देव दीपावली को प्रांतीय मेले का दर्जा मिला है। प्रयागराज के कुंभ, माघ और महाकुंभ मेलों के साथ ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजन पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। महाकुंभ-2025 में रिकॉर्ड 66 करोड़ श्रद्धालुओं की भागीदारी इस यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव रही।

पर्यटन नीति-2022 के लागू होने के बाद प्रदेश में ₹36,681 करोड़ से अधिक निवेश जमीन पर उतर चुका है। इससे करीब 5 लाख रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण हो चुका है। युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए ₹40,000 मासिक स्टाइपेंड की व्यवस्था भी की गई है।

पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। 850 प्रशिक्षित गाइड नियुक्त किए गए हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन कर 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार ने तीर्थ यात्रियों के लिए विशेष योजनाएं भी शुरू की हैं जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ₹1 लाख और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए ₹20 हजार का अनुदान शामिल है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। इनमें लगभग 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

अकेले अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ही 116 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। यह कुल पर्यटन का लगभग 90 प्रतिशत है। पर्यटन मंत्री के अनुसार एक पर्यटक कम से कम 6 लोगों की आय का जरिया बनता है। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश देश में घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में पहले स्थान पर पहुंच चुका है।

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