योगेंद्र मलिक
देहरादून, 25 मार्च 2026:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार, रोजगार सृजन और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इन निर्णयों का सीधा असर आम जनता से लेकर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर देखने को मिलेगा।
बैठक में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग के तहत एशियाई विकास बैंक (ADB) समर्थित पुल सुधार परियोजना में एक करोड़ रुपये से अधिक की कंसल्टेंसी टेंडर को मंजूरी दी गई। वहीं वन विभाग में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पद के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दी गई। इससे पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे।
न्यायिक अधिकारियों को राहत देते हुए वाहन खरीद के लिए 10 लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन देने का निर्णय लिया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों पर 4% और अन्य वाहनों पर 5% ब्याज दर तय की गई है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 31 मार्च 2025 तक स्थापित सोलर संयंत्रों को सब्सिडी देने की अनुमति दी गई।

उच्च शिक्षा में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय से जुड़े विषयों के नियमन के लिए परिनियम को मंजूरी दी गई। गृह विभाग के तहत लोक एवं निजी संपत्ति वसूली अधिनियम की नियमावली लागू होगी जबकि होमगार्ड्स सेवा संशोधन नियमावली से पदोन्नति में आ रही बाधाएं दूर होंगी। पुलिस प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की नियुक्ति को भी हरी झंडी दी गई।
भर्ती प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखने के लिए वर्दीधारी पदों की पुरानी नियमावली को अगले तीन वर्षों तक लागू रखा जाएगा। वहीं एडेड स्कूलों के शिक्षकों की सेवा को प्रमोशन में मान्यता देने के लिए एक उपसमिति गठित की जाएगी।
किसानों के हित में रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है और 2.2 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। मंडी शुल्क 2% ही बनाए रखने का निर्णय भी लिया गया।
रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखण्ड वीर उद्यमी योजना 2026’ को मंजूरी दी गई है। इसमें पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए 10% आरक्षण रहेगा तथा 15% से 30% तक सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा राज्य योजना आयोग के स्थान पर ‘सेतु आयोग’ के गठन को स्वीकृति दी गई, जिससे विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद है।






