लखनऊ/बहराइच, 29 मार्च 2026:
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब निर्णायक लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। 4 अप्रैल को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की महारैली को लेकर बहराइच में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक में लखनऊ से पहुंचे प्रांतीय शिक्षक नेता सुधांशु मोहन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि TET की अनिवार्यता अनुभवी शिक्षकों के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे और दिल्ली की सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत दिखाएंगे।
विशिष्ट अतिथि अजय सिंह और धीरेंद्र कुमार ने भी आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। बैठक में श्रावस्ती जनपद के पदाधिकारियों ने भी TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुटता दिखाई और इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया।
जिलाध्यक्ष विनय पांडेय ने कहा कि दशकों से शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षकों को अब पात्रता की कसौटी पर कसना सरासर गलत है। वहीं जिला मंत्री सत्य प्रकाश वर्मा ने इसे शिक्षकों के भविष्य को अंधकार में धकेलने की साजिश बताया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने दो टूक कहा कि शिक्षकों का अनुभव ही उनकी असली पात्रता है, न कि कोई कागजी परीक्षा।

बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों और शिक्षकों ने संकल्प लिया कि पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में शिक्षक 4 अप्रैल को दिल्ली पहुंचेंगे और आंदोलन को ऐतिहासिक बनाएंगे। शिक्षक एकता जिंदाबाद के नारों के साथ सैकड़ों शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार को चेतावनी दी कि यदि TET अनिवार्यता का फैसला वापस नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और भी तेज हो सकता है।
इस अवसर पर जिला संयुक्त मंत्री अंकित श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष सुनील दत्त शुक्ला, ब्लॉक अध्यक्ष अनूप श्रीवास्तव, जनार्दन यादव, जय कृष्णा मिश्रा, श्रवण सिंह, उर्मिलेश पांडेय, अनवर खान, प्रेम सिंह यादव, राकेश श्रीवास्तव, शांतनु मौर्य, देवेंदु त्रिपाठी, राधेश्याम सिंह, कृष्ण कुमार, अनूप वर्मा, कमलेश यादव, संतोष मिश्रा, सुनील चौधरी, मीनल श्रीवास्तव सहित तमाम शिक्षक उपस्थित रहे।






