लखनऊ/अंबेडकरनगर, 29 मार्च 2026:
यूपी के अंबेडकरनगर जनपद में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगमन ने रविवार को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सियासी और वैचारिक हलचल भी पैदा कर दी। टांडा क्षेत्र के गोवर्धनपुर स्थित मां सिद्धेश्वरी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन धर्म के मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डालने के साथ कई समसामयिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी भी की।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म का मूल आधार मर्यादा, त्याग और अनुशासन है। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत जीवन में सादगी, संयम और उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म के मार्ग पर चलने वालों को किसी भी परिस्थिति में अपने आचरण से समझौता नहीं करना चाहिए।
हालांकि उनके वक्तव्य में अहम बात धर्मयुद्ध यात्रा और गोसंरक्षण को लेकर रही। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि तीन मई से 23 जुलाई तक पूरे प्रदेश में यात्रा निकाली जाएगी। यह गोमाता के प्रति हो रही अनदेखी और अन्याय के विरोध में होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिन के समय का जिक्र करते हुए कहा कि स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि गोमाता की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो।
रामभद्राचार्य से विवाद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने संतों को दो श्रेणियों ‘सरकारी’ और ‘असर-कारी’ में बांटा। उन्होंने कहा कि सरकारी संत सत्ता के पक्ष में बोलते हैं जबकि असर-कारी संत जनता के हित में सवाल उठाते हैं। उन्होंने खुद को दूसरी श्रेणी में बताया।
इसके अलावा उन्होंने यूजीसी में किए गए संशोधनों पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि किसी भी शिकायत पर सीधे कार्रवाई करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। शनिवार रात अंबेडकरनगर पहुंचे शंकराचार्य के टांडा में प्रवास के बाद रविवार को हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया। इससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो गया।






