लखनऊ, 31 मार्च 2026:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने मंगलवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में अहम बैठक कर संगठन को नई दिशा देने के संकेत दिए। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में 250 से अधिक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना, आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी रहा।
मायावती ने बैठक में 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेशभर से कार्यकर्ताओं को इस रैली में शामिल किया जाए। माना जा रहा है कि यह आयोजन पिछले साल कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर हुई रैली की तर्ज पर होगा जिसमें भारी भीड़ जुटने की संभावना है।

बैठक में मायावती ने जिलाध्यक्षों और मंडल कोऑर्डिनेटरों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि पार्टी के प्रति निष्ठा, लगन और मेहनत ही सफलता की कुंजी है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए कोई जगह नहीं है।
राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हुए मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोटी-रोजी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है जबकि सरकारें केवल वादों और जुमलों तक सीमित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल प्राइवेट सेक्टर के सहारे देश आत्मनिर्भर बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए मायावती ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव को महंगाई का कारण बताया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, गैस और जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा असर गरीब और मेहनतकश वर्ग पर पड़ा है। सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि देश को नोटबंदी या कोरोना जैसी परिस्थितियों का दोबारा सामना न करना पड़े।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा। मायावती ने कहा कि अगर कमजोर वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं दिया जाएगा तो उनका वास्तविक विकास संभव नहीं है।
दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में महज एक सीट पर सिमटने वाली बसपा अब 2027 के चुनाव को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रही है। पार्टी का फोकस अपने कोर दलित वोट बैंक को बचाए रखने के साथ-साथ उसे और मजबूत करने पर है।
इसी बीच कांग्रेस भी दलित वोट बैंक को साधने में जुटी है। हाल ही में राहुल गांधी ने लखनऊ में दलित नेताओं के साथ बैठक कर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई थी। वहीं, पश्चिमी यूपी में आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर भी लगातार सक्रिय हैं। बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में 14 अप्रैल की रैली को बसपा के लिए शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने का बड़ा मंच माना जा रहा है।






