Lucknow City

UP के तीर्थ पर्यटन को बूस्टर : नैमिषारण्य से शुकतीर्थ तक बदलेगा धार्मिक नक्शा

काशी, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज की तर्ज पर विकसित किए जा रहे प्रदेश के सभी बड़े तीर्थ स्थल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, देवीपाटन, विन्ध्यवासिनी धाम और शुकतीर्थ की विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि मंजूर

लखनऊ, 15 फरवरी 2026:

धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में विशेष प्रावधान कर यूपी के तीर्थ मानचित्र को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। काशी, अयोध्या और प्रयागराज की तर्ज पर अब नैमिषारण्य, चित्रकूट धाम, देवीपाटन, विंध्यवासिनी धाम और शुकतीर्थ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी है। सरकार का फोकस बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर है।

सीतापुर जनपद स्थित नैमिषारण्य में पर्यटन अवस्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यहां पहले से चल रही 38 परियोजनाओं में से नौ लगभग पूरी हो चुकी हैं। नई धनराशि से घाटों का सुंदरीकरण, मार्गों का चौड़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं का काम तेज होगा। इससे श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों और साधु-संतों को भी सहूलियत मिलेगी।

चित्रकूट धाम के समेकित विकास के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के सौंदर्यीकरण, देवांगना एयरपोर्ट के पास पर्यटन सुविधा केंद्र, राम वनगमन मार्ग के पड़ाव स्थलों पर सुविधाओं का विकास और मंदाकिनी नदी के रामघाट, तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर तथा महर्षि वाल्मीकि आश्रम के सौंदर्यीकरण जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।

ये भी पढ़ें:

4e34372a-2a71-4849-bec7-9019c58ab690

Advertisement

मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम में 100 करोड़ रुपये से मार्गों का चौड़ीकरण, लाइटिंग, पार्किंग और आश्रय स्थल विकसित किए जाएंगे। विन्ध्यक्षेत्र में मां अष्टभुजा देवी मंदिर, कालीखोह और विंध्यवासिनी मंदिर के त्रिकोणीय परिक्रमा मार्ग के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बलरामपुर स्थित देवीपाटन में 40 करोड़ रुपये से मां पाटेश्वरी देवी मंदिर परिसर का कायाकल्प होगा। वहीं हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर को 25 करोड़ और मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ को 15 करोड़ रुपये मिले हैं।

इसके अलावा अन्य प्राचीन संरक्षित मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार की इस व्यापक पहल से प्रदेश के तीर्थस्थलों का स्वरूप बदलेगा। श्रद्धालुओं की सुविधाएं सुधरेंगी और पर्यटन के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शिरीष मिश्रा के अनुसार यह पहल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। इससे स्थानीय रोजगार, सेवा क्षेत्र और छोटे कारोबारों को भी संबल मिलेगा।

ये भी पढ़ें  नकली दवाओं के नेटवर्क पर शिकंजा : लखनऊ में 8.87 करोड़ की फर्जी खरीद का खेल, चार पर FIR

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link