लखनऊ, 31 मार्च 2026:
यूपी में औद्योगिक विकास ने बीते नौ वर्षों में अभूतपूर्व गति पकड़ी है। योगी सरकार की नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल का असर है कि अप्रैल 2017 से अब तक प्रदेश में 17,841 नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद 70 वर्षों (1947 से मार्च 2017) में 14,178 कारखाने ही स्थापित हो पाए थे। अब प्रदेश में पंजीकृत कारखानों की संख्या बढ़कर 32,019 हो गई है।
प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम के अनुसार सीएम योगी का लक्ष्य प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इसी दिशा में सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस और भूमि बैंक जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया है। बेहतर कानून-व्यवस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया है।

औद्योगिक विस्तार का असर रोजगार पर भी साफ दिख रहा है। अप्रैल 2017 के बाद स्थापित कारखानों में 16,53,179 लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 15,29,907 पुरुष और 1,23,272 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है।
क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में भी सरकार ने अहम काम किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10,895 कारखाने पंजीकृत हुए। मध्य यूपी में 3,526, पूर्वी यूपी में 3,205 और बुंदेलखंड में 215 नए उद्योग स्थापित हुए हैं।
कारखानों के आकार की बात करें तो 14,412 छोटे कारखानों में 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं। 3,213 मध्यम कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक और 118 बड़े कारखानों में 1000 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने MSME से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी को समान अवसर दिया है।

एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने औद्योगिक विकास को नई रफ्तार दी है। उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि आधारित राज्य नहीं रहा बल्कि तेजी से एक मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। इन नए कारखानों ने लाखों लोगों को रोजगार देने के साथ प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है। इससे लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।






