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वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने वाले IAS अफसर ने दिया इस्तीफा… जानिए कौन हैं रिंकू सिंह राही

भ्रष्टाचार उजागर कर गोलियों का सामना करने वाले अफसर का तर्क, जनसेवा का मौका नहीं मिला, विवादों और उपेक्षा के बीच छोड़ी नौकरी, शाहजहांपुर के घटनाक्रम के बाद नौ माह पहले राजस्व परिषद में किए गए थे अटैच

लखनऊ, 31 मार्च 2026:

यूपी कैडर के 2022 बैच के आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के साथ एक बार फिर रिंकू सिंह ने सुर्खियां बटोरी हैं। कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक कदम उठाने वाले और जानलेवा हमले से बचकर निकले इस अधिकारी का यह फैसला प्रशासनिक तंत्र पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे के मुद्दे पर कहा कि लंबे समय से उन्हें न तो कोई पोस्टिंग दी जा रही थी और न ही कोई जिम्मेदारी। उन्होंने इसे नैतिक निर्णय बताते हुए कहा कि संबद्ध रहते हुए भी जनसेवा का अवसर नहीं मिल रहा था। ऐसे में पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं था।

विवाद से उपेक्षा तक का सफर

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रिंकू सिंह राही का नाम जुलाई 2025 में तब चर्चा में आया जब शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ। तहसील निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को खुले में पेशाब करते देख उठक-बैठक लगवाई। जब इस पर वकीलों ने विरोध किया तो उन्होंने खुद भी कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई।

यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया। इसके बाद 30 जुलाई 2025 को उन्हें एसडीएम पद से हटाकर लखनऊ स्थित राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया। तब से उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।

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गोलियों से बचा अफसर, जिसने खोली थी घोटाले की पोल

रिंकू सिंह राही का करियर सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि साहस और ईमानदारी की मिसाल भी रहा है। 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा किया था।

इस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ। बैडमिंटन खेलते समय दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं। इस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ। एक आंख की रोशनी चली गई और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई। करीब एक महीने तक अस्पताल में इलाज और कई सर्जरी के बाद उन्होंने जिंदगी की जंग जीती।

साधारण परिवार से असाधारण सफर

20 मई 1982 को हाथरस जिले में जन्मे रिंकू सिंह राही का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता एक छोटी आटा चक्की चलाते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले रिंकू ने 12वीं में अच्छे अंक हासिल किए और स्कॉलरशिप पाई। इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया।

2004 में यूपीपीसीएस परीक्षा पास कर उन्होंने प्रशासनिक सेवा में कदम रखा और 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने। नौकरी के साथ ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल कर 2022 बैच के आईएएस अधिकारी बने। दिव्यांग कोटे से इस मुकाम तक पहुंचना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

सिस्टम पर उठे सवाल

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा सिर्फ एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं माना जा रहा बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जान जोखिम में डालने वाले अफसर को लंबे समय तक बिना जिम्मेदारी के रखना बहस का विषय बन गया है।

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