लखनऊ, 31 मार्च 2026:
प्रदेश में पर्यटन और संस्कृति से जुड़े कामों में इस साल अच्छी रफ्तार देखने को मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत दोनों विभागों ने अपने बजट का बड़ा हिस्सा मंजूर कर दिया है, जिससे कई परियोजनाएं अब जमीन पर उतरती नजर आ रही हैं। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की मौजूदगी में हुई विभागीय समीक्षा के बाद साफ किया गया है कि तय समय में काम पूरा करना और गुणवत्ता बनाए रखना सबसे अहम रहेगा।
1801 करोड़ के बजट में 96 फीसदी रकम मंजूर
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1801.30 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 1729.22 करोड़ रुपये यानी करीब 96 फीसदी राशि को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं संस्कृति विभाग ने भी 200 करोड़ रुपये के बजट में से 186.96 करोड़ रुपये, यानी करीब 93.48 फीसदी राशि स्वीकृत कर दी है। इससे साफ है कि दोनों विभाग योजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं और काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पारदर्शिता के साथ तय समय मे करें खर्च
पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय समीक्षा के दौरान बजट के इस्तेमाल को लेकर साफ निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खर्च पूरी पारदर्शिता और तय समय के भीतर होना चाहिए, ताकि योजनाओं का फायदा सीधे लोगों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि हर परियोजना का असर जमीन पर दिखे, इस पर फोकस है।
बड़ी परियोजनाओं पर काम के साथ तैयार हो रहे नए पर्यटन केंद्र
प्रदेश को पर्यटन के लिहाज से मजबूत बनाने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें लखनऊ में प्रस्तावित अत्याधुनिक नौसेना संग्रहालय, अयोध्या में लव-कुश पार्क, श्रद्धा, रामायण वैक्स म्यूजियम और आधुनिक रामकथा संग्रहालय शामिल हैं। फिरोजाबाद में ग्लास म्यूजियम और उत्तर भारत का पहला आधुनिक आर्य गुरुकुल म्यूजियम भी योजना में है। इसके अलावा कम चर्चित पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों को भी विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है, ताकि नए पर्यटन केंद्र तैयार किए जा सकें।
छोटे व्यापारियों व कारीगरों को मिलेगा अवसर
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रमुख राजमार्गों के किनारे वे-साइड एमेनिटीज विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। इन केंद्रों पर साफ और सुरक्षित शौचालय, अच्छे फूड कोर्ट, पार्किंग, ईंधन की सुविधा, सीसीटीवी निगरानी और आराम के लिए स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। छोटे व्यापारियों और कारीगरों को भी इन जगहों पर अपना सामान बेचने का मौका मिलेगा।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाए और काम की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। बजट के बेहतर इस्तेमाल के साथ योजनाओं की लगातार निगरानी पर भी जोर दिया गया।






