लखनऊ, 12 अप्रैल 2026:
यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टलने की संभावनाओं को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने राज्य सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संभावित हार के डर से चुनाव टालने की साजिश रची जा रही है।
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीश ने जारी बयान में कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार भाजपा के भीतर यह चर्चा आम है कि पंचायत चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से किए गए वादों को पूरा न करने और खोखले दावों के कारण भाजपा की साख राज्य ही नहीं देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कमजोर हुई है।
डॉ. गिरीश ने कहा कि गत लोकसभा चुनाव परिणामों ने भी यह संकेत दिया है कि जनता का भरोसा भाजपा से कम हुआ है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले पंचायत चुनावों से पार्टी घबराई हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार प्रशासकों की नियुक्ति कर सकती है। इससे विकास के लिए निर्धारित धन का दुरुपयोग होने की आशंका है।

भाकपा नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निजी राजनीतिक हितों के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया गया तो जनता का आक्रोश और बढ़ेगा। पार्टी ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर ही कराए जाएं जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कायम रहे।
इसके साथ ही भाकपा ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर कराए जाने चाहिए। फिलहाल इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।






