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AI करेगा जल प्रबंधन! जल सूचक ऐप से बदलेगी गांवों की तस्वीर, अब हर बूंद का होगा हिसाब

बेंगलुरु में लॉन्च हुआ AI आधारित मोबाइल ऐप, असम से शुरू हुई डिजिटल क्रांति, फोटो और AI के जरिए पानी सप्लाई का सटीक रिकॉर्ड, जल्द पूरे देश में लागू होगा मॉडल

न्यूज डेस्क, 22 अप्रैल 2026:

देश में जल संकट और असमान वितरण की पुरानी समस्या पर अब तकनीक का सटीक प्रहार शुरू हो गया है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाने की कवायद को और मजबूत करने के लिए जल सूचक नाम का एक AI आधारित मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। ये ग्रामीण जल प्रबंधन की तस्वीर बदलने को तैयार है।

इस ऐप को हाल ही में बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में रोहिणी नीलकणी द्वारा लॉन्च किया गया और इसका इस्तेमाल असम में शुरू भी हो चुका है। अब इसे चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की तैयारी है।

ग्रामीण इलाकों में पानी की सप्लाई केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं होती बल्कि रोजाना की छोटी-छोटी गतिविधियों जैसे पानी चालू करना, बंद करना और सप्लाई की मात्रा दर्ज करना आदि पर निर्भर करती है। अब तक इन प्रक्रियाओं में डेटा की सटीकता और सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती थी जिससे योजनाओं और फैसलों पर असर पड़ता था।

यहीं पर जल सूचक गेमचेंजर बनकर उभरा है। यह ऐप फ्रंटलाइन वर्कर्स को बेहद आसान इंटरफेस देता है। इसके जरिए वे पानी सप्लाई का डेटा दर्ज करते हैं। खास बात यह है कि सप्लाई का प्रमाण फोटो के रूप में लिया जाता है। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तुरंत प्रोसेस कर विश्वसनीय डेटा में बदल देता है। इससे हर दिन की जल आपूर्ति का प्रमाणित और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार होता है।

असम में इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही प्रभावशाली नतीजे दे चुका है। राज्य के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHE) के साथ मिलकर विकसित इस प्लेटफॉर्म का उपयोग 16,500 से अधिक पंप ऑपरेटर कर रहे हैं। अब तक 20 लाख से ज्यादा रीडिंग दर्ज की जा चुकी हैं। करीब 37,600 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई का डेटा रिकॉर्ड किया गया है।

यह ऐप केवल फोटो आधारित डेटा तक सीमित नहीं है। इसमें बल्क फ्लो मीटर, इलेक्ट्रिक मीटर, पंप संचालन समय, IoT डिवाइस और मैनुअल एंट्री जैसे कई इनपुट को भी जोड़ा जा सकता है। साथ ही यह प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषाओं में काम करता है और अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर डेटा को एकीकृत करने की क्षमता रखता है।

असम सरकार के PHE विभाग के सचिव और जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक कैलाश कार्तिक के अनुसार ग्रामीण जल ढांचे के विस्तार के बावजूद जमीनी हकीकत समझना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। जल सूचक इस कमी को दूर कर पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करता है। वहीं, आर्ग्यम के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं गवर्नमेंट पार्टनरशिप्स के निदेशक दीपक गुप्ता का कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक भरोसेमंद जल सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

दरअसल, जल सूचक आर्ग्यम की उस व्यापक पहल का हिस्सा है जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है। यह नॉन-प्रॉफिट संस्था सरकारों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर ऐसे ओपन और इंटरऑपरेबल सिस्टम विकसित कर रही है जो बड़े स्तर पर सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बना सकें।

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