न्यूज डेस्क, 8 जून 2026:
कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर में वैज्ञानिक ऐसी वैक्सीन विकसित करने की कोशिश में जुटे हैं जो सिर्फ मौजूदा वायरस ही नहीं बल्कि भविष्य में उभरने वाले खतरनाक संक्रमणों से भी सुरक्षा प्रदान कर सके। इसी दिशा में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक नई यूनिवर्सल वैक्सीन तकनीक विकसित करने का दावा किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह वैक्सीन एक विशेष ‘सुपर-एंटीजन’ पर आधारित है जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कई प्रकार के वायरसों के खिलाफ तैयार कर सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक न केवल मौजूदा कोरोनावायरस के विभिन्न स्वरूपों बल्कि भविष्य में जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संभावित वायरसों के खिलाफ भी सुरक्षा देने में सक्षम हो सकती है।
अब तक अधिकांश वैक्सीन किसी विशेष वायरस या उसके स्ट्रेन को ध्यान में रखकर विकसित की जाती रही हैं। वायरस के बदलते स्वरूप के कारण समय-समय पर बूस्टर डोज और नई वैक्सीन की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि नई तकनीक का उद्देश्य वायरस के बदलने से पहले ही शरीर को व्यापक सुरक्षा प्रदान करना है।

इस वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण भी किया जा चुका है। जर्नल ऑफ इन्फेक्शन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 39 स्वयंसेवकों पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी पाई गई। अध्ययन में देखा गया कि वैक्सीन ने सार्स-सीओवी-2, सार्स और चमगादड़ों में पाए जाने वाले कुछ संबंधित वायरसों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वेटेरिनरी मेडिसिन विभाग की लैब ऑफ वायरल जूनोटिक्स के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जोनाथन हीनी ने कहा कि उनका उद्देश्य वैक्सीन विकास की प्रक्रिया को केवल प्रतिक्रिया देने वाली प्रणाली से बदलकर भविष्य के लिए तैयार सुरक्षा प्रणाली में बदलना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक आगे के परीक्षणों में सफल रहती है तो कोरोना, फ्लू और इबोला जैसे तेजी से बदलने वाले वायरसों से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इससे भविष्य में महामारी फैलने की आशंका को कम करने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अभी इस तकनीक को व्यापक स्तर पर परीक्षणों से गुजरना होगा। फेज-2 और फेज-3 ट्रायल के बाद ही इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और उपयोगिता का आकलन किया जा सकेगा। इसके बावजूद शुरुआती नतीजों ने भविष्य की महामारी रोकथाम को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।






