Uttar Pradesh

किसानों की आय बढ़ाने का महा प्लान : लखनऊ में जुटेंगे 9 राज्यों के दिग्गज, UP मॉडल पर फोकस

कल होने वाले कृषि सम्मेलन में ऋण, फसल विविधीकरण, डीएसआर तकनीक और नकली खाद पर कड़े एक्शन की रणनीति तय होगी, सीएम योगी व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान होंगे शामिल

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026:

यूपी कृषि क्षेत्र में तेजी से उभरते मॉडल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। अब इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन) आयोजित किया जा रहा है। एक होटल में होने वाले इस अहम सम्मेलन में यूपी समेत 9 राज्यों के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, एफपीओ, प्रगतिशील किसान और कृषि वैज्ञानिक हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन का उद्घाटन सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर की मौजूदगी में होगा। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि यह सम्मेलन केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने का मंच बनेगा।

बैठक में कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, एफपीओ की भूमिका, स्टार्टअप, नाबार्ड और प्रसंस्करण इकाइयों के विकास जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन और बागवानी क्षेत्र की संभावनाओं को लेकर भी व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

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यूपी अपनी नवाचार आधारित खेती को सम्मेलन में प्रमुखता से प्रस्तुत करेगा। गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग और धान की सीधी बोआई (डीएसआर) तकनीक को राज्य के सफल प्रयोग के रूप में पेश किया जाएगा। इसे केंद्र सरकार पहले ही किसानों के हित में प्रभावी मान चुकी है। वहीं पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड भी अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाई गई उन्नत पद्धतियों को साझा करेंगे।

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सम्मेलन में एक बड़ा फोकस नकली कीटनाशकों और उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण पर रहेगा। इसके साथ ही रासायनिक खादों के विकल्प, संतुलित उपयोग और प्रभावी वितरण प्रणाली को मजबूत करने पर भी रणनीति बनेगी।
कृषि मंत्री ने साफ किया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद उपलब्ध है, जिसमें 11.5 लाख एमटी यूरिया शामिल है।

सरकार अब ढेंचा बीज के वितरण पर जोर दे रही है.जिससे यूरिया की खपत में 20 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य है। यह सम्मेलन राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ उत्तर भारत के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में नई नीति तय करने में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

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