देहरादून/ऋषिकेश, 23 अप्रैल 2026:
एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्नातक हुए डॉक्टरों से रूबरू होकर कहा कि यह डिग्री सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने पेशे को सिर्फ नौकरी न समझें, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता के साथ निभाएं।
उन्होंने कहा कि सुशासन का मतलब लोगों की जरूरत समझना और उन्हें समय पर मदद देना है। एम्स ऋषिकेश की तारीफ करते हुए उन्होंने इसे इलाज, शिक्षा, रिसर्च और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में मजबूत संस्थान बताया।
उपराष्ट्रपति ने खास तौर पर टेलीमेडिसिन सेवाओं का जिक्र किया और कहा कि इलाज अब अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच जरूरी है। उन्होंने हेली एम्बुलेंस और चारधाम यात्रा के दौरान दवाओं की ड्रोन से सप्लाई जैसी पहलों को भी अहम बताया, जिससे मुश्किल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने नए डॉक्टरों से कहा कि पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को चुनौती नहीं, अवसर के रूप में देखें। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल हेल्थ के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ खुद को लगातार अपडेट रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल पेशा नहीं, बल्कि इंसानियत की सेवा का सबसे बड़ा जरिया है। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश आज राज्य के लिए अहम संस्थान बन चुका है, जहां कैंसर, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का योगदान समाज और देश के निर्माण में सीधा असर डालता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि मरीज का भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि हर हाल में मरीज के हित को प्राथमिकता दें और अपने काम में ईमानदारी बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, इसलिए लगातार सीखते रहना जरूरी है।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन प्रो. सौरभ समेत कई विशिष्ट लोग व छात्र मौजूद रहे।






