लखनऊ, 23 अप्रैल 2026:
असमय हुई बारिश से प्रभावित गेहूं की फसल को लेकर प्रदेश सरकार ने बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए अब गेहूं की खरीद शिथिल मानकों के तहत की जाएगी। इससे लाखों किसानों को मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने से बचाया जा सकेगा।
सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अब लस्टर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इसके अलावा सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा पहले केवल 6 प्रतिशत थी। उसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इस बदलाव का सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल बारिश के कारण गुणवत्ता में प्रभावित हो गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और उसका अलग लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। इतना ही नहीं इस गेहूं का उपयोग केवल उत्तर प्रदेश के भीतर ही किया जाएगा जिससे गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर पूरा नियंत्रण बना रहे।
सबसे अहम बात यह है कि ऐसे गेहूं के भंडारण के दौरान यदि गुणवत्ता में कोई गिरावट होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। इसके साथ ही इस स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने की योजना भी बनाई गई है। इससे लंबे समय तक भंडारण से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
सरकार के इस फैसले को किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालिया बारिश ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया था, वहीं यह निर्णय उनके आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होगा। कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने और किसानों का भरोसा कायम रखने की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






