Uttar Pradesh

अब जीपीएस में कैद होगा हर खेत…गन्ने की फसल का डिजिटल सर्वे एक मई से

सर्वे से पहले किसानों को SMS अलर्ट, टीम मौके पर पहुंचकर करेगी माप, नए किसानों का रजिस्ट्रेशन भी साथ-साथ, 30 जून तक पूरा होगा अभियान

लखनऊ, 24 अप्रैल 2026:

प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए इस बार सर्वे का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। सरकार ने गन्ने की फसल का जीपीएस आधारित सर्वे कराने का फैसला किया है, जिसकी तैयारी गन्ना विभाग ने शुरू कर दी है। यह सर्वे एक मई से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा।

सर्वे शुरू होने से पहले रजिस्टर्ड किसानों को उनके मोबाइल पर SMS के जरिए सूचना दी जाएगी, ताकि वे तय समय पर अपने खेत पर मौजूद रह सकें। विभाग के मुताबिक सर्वे के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी रखी गई है।

हर टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल का कर्मचारी शामिल होगा। इन दोनों को पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। टीम खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए फसल का पूरा डेटा सीधे विभाग के सर्वर पर अपलोड करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद खेत का रकबा, गन्ने की किस्म जैसी जानकारी भी किसान को SMS से भेजी जाएगी।

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गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए सर्वे नीति जारी हो चुकी है। तय समय के भीतर सर्वे पूरा कर लिया जाएगा। किसानों की जमीन का मिलान राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in पर भी किया जा सकेगा। सर्वे के अंतिम आंकड़े चीनी मिलें विभागीय पोर्टल पर अपलोड करेंगी और अपनी वेबसाइट पर भी दिखाएंगी।

इस बार सर्वे के साथ नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर तक जो किसान रजिस्ट्रेशन करा लेंगे, उन्हें ही गन्ना आपूर्ति का फायदा मिलेगा। उत्पादन बढ़ाने के लिए इसी अवधि तक आवेदन लिए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों से 10 रुपये, छोटे किसानों से 100 रुपये और अन्य किसानों से 200 रुपये फीस तय की गई है।

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