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‘एक पेड़ मां के नाम’ की गूंज ब्रिक्स देशों तक, यूपी मॉडल को अपनाने की तैयारी

37 करोड़ पौधे एक दिन में लगाकर बनाया रिकॉर्ड, 9 देशों के युवाओं ने वर्चुअल समिट में सराहा अभियान, भावनात्मक जुड़ाव से पर्यावरण बचाने की पहल पर जोर, बागपत के अमन कुमार ने रखा भारत का पक्ष

लखनऊ, 1 मई 2026:

पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश की पहल अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में है। ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान ने पौधरोपण को जनआंदोलन का रूप दिया है, जिसकी गूंज ब्रिक्स देशों तक पहुंची है। बीते 9 जुलाई 2025 को एक ही दिन में 37 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाकर प्रदेश ने रिकॉर्ड बनाया था। पिछले नौ साल में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के वर्चुअल समिट में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, ईरान और इंडोनेशिया के युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान इन देशों के युवाओं ने यूपी के अभियान को प्रभावी मॉडल बताया। उनका कहना रहा कि इस तरह की पहल लोगों को प्रकृति से भावनात्मक तौर पर जोड़ती है, जिससे पर्यावरण बचाने की कोशिश मजबूत होती है।

प्रतिभागियों ने माना कि केवल जागरूकता से काम नहीं चलेगा, ऐसे अभियान जरूरी हैं जो सीधे समाज के दिल तक पहुंचें। कई देशों के युवाओं ने अपने यहां भी इसी तरह का अभियान शुरू करने की बात कही। बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि समिट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व अमन कुमार ने किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के खतरे पर बात रखते हुए कहा कि हर नागरिक को प्रकृति संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी। अमन ने स्वयंसेवा के जरिए पर्यावरण बचाने का संदेश भी साझा किया।

अस्मिता लाल के मुताबिक यूपी में यह अभियान सिर्फ पौधरोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे समाज की भावना और जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। यही वजह है कि यह पहल अब दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अमन कुमार को स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित कर चुके हैं। अमन का कहना है कि प्रदेश में पर्यावरण को लेकर जिस स्तर पर काम हुआ है, वह पहले नहीं देखा गया।

बागपत डीएम अस्मिता लाल ने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता उसके भावनात्मक जुड़ाव पर निर्भर करती है। यूपी ने इस दिशा में अलग पहचान बनाई है। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह मॉडल दिखाता है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

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