लखनऊ/लेह, 3 मई 2026:
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में 2569वीं वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था, अध्यात्म और वैश्विक विमर्श का अद्भुत संगम देखने को मिला। महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिमालयन बौद्ध सम्मेलन ने आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने के साथ वैश्विक शांति और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर मंथन का मंच भी प्रदान किया।
भारत और उससे परे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में हिमालयी बौद्ध धर्म के योगदान विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। तथागत के पवित्र अवशेषों के दिव्य दर्शन के बीच उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की ‘बोधि यात्रा’ उत्तर प्रदेश की पावन भूमि से प्रारंभ होकर आज पूरी दुनिया में शांति और करुणा का संदेश फैला रही है।
उन्होंने बताया कि 14 मई तक चलने वाली यह समारोह श्रृंखला धार्मिक उत्सव के साथ ही वैश्विक एकता और मानव कल्याण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस दौरान लद्दाख प्रवास पर पहुंचे मंत्री जयवीर सिंह का उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सम्मान किया। मंत्री ने भी उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सांस्कृतिक संवाद को और मजबूत किया।

सम्मेलन में प्रदर्शित भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, जो 1898 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा से प्राप्त हुए थे, श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने। छठी शताब्दी ईसा पूर्व से जुड़े ये अवशेष, मूर्तियां और पांडुलिपियां बुद्ध की सार्वभौमिकता का सशक्त प्रमाण मानी जाती हैं। पखवाड़े भर चलने वाली इस दुर्लभ प्रदर्शनी से देश-विदेश के पर्यटकों को अनूठा आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा।
जयवीर सिंह ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ‘बौद्ध सर्किट’ का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। ये पर्यटन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि है। वहीं बौद्ध पर्यटन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। 2022 में 22.40 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे।
उन्होंने यह भी बताया कि 2023-24 से 2025-26 के बीच बौद्ध स्थलों के विकास पर 226.08 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दुनिया संघर्ष और अशांति से जूझ रही है। ऐसे समय में भगवान बुद्ध का शांति संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
मंत्री ने सम्मेलन में आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पवित्र स्थलों से करें जहां बुद्ध की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत रूप में विद्यमान है।






