लखनऊ, 5 मई 2026:
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट बैठक में प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ बनाने के लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। इन निर्णयों का फोकस साफ है कि जिला स्तर पर विकास की निगरानी को प्रोफेशनल बनाना, न्याय व्यवस्था को डिजिटल और तेज करना, युवाओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ना और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करना।
सबसे अहम फैसले के तहत अब हर जिले में ओटीडी सीएम फेलोशिप लागू होगी। इसके जरिए डीएम की अगुवाई में काम करने वाले ओटीडी सेल को मजबूत किया जाएगा। दो विशेषज्ञ, एक आर्थिक विकास फेलो और एक डेटा विश्लेषक तैनात किए जाएंगे। ये फेलो कृषि, उद्योग, निवेश, पर्यटन, रोजगार और जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) जैसे क्षेत्रों की निगरानी कर डेटा आधारित रणनीतियां तैयार करेंगे।
नियोजन विभाग के डैशबोर्ड से केपीआई आधारित ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी। इससे फैसले अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेंगे। फेलोशिप के लिए परास्नातक डिग्री अनिवार्य है और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, अधिमानी योग्यता और साक्षात्कार शामिल होंगे। चयनित अभ्यर्थियों को ₹50,000 मासिक मानदेय, लैपटॉप, यात्रा और आवासीय सुविधा दी जाएगी।
न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कैबिनेट ने तीन नए नियम ई-साक्ष्य प्रबंधन, ई-समन और सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस 2026 लागू किए गए हैं। अब डिजिटल साक्ष्य (मोबाइल डेटा, वीडियो, ईमेल आदि) वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित किए जाएंगे। इससे छेड़छाड़ की संभावना कम होगी और केस मजबूत बनेंगे। ई-समन के जरिए कोर्ट नोटिस अब डिजिटल माध्यम से भेजे जाएंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और ट्रैक करने योग्य होगी।
छोटे अपराधों में जेल के बजाय सामुदायिक सेवा का विकल्प देकर सुधारात्मक न्याय पर जोर दिया गया है। इसके तहत सफाई, वृक्षारोपण, ट्रैफिक प्रबंधन और गो-सेवा जैसे कार्य कराए जा सकेंगे। इससे जेलों का बोझ भी घटेगा और समाज को लाभ मिलेगा।
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए 150 राजकीय विद्यालयों में ‘ड्रीम’ स्किल लैब्स स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इन लैब्स में रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस परियोजना में टाटा नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट्स लिमिटेड 68% निवेश करेगी, जबकि 32% हिस्सा राज्य सरकार का होगा। इसका लक्ष्य छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
औद्योगिक विकास को ऊर्जा देने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में 400/220 केवी का अत्याधुनिक जीआईएस बिजली उपकेंद्र स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। करीब ₹653.53 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और फिल्म सिटी जैसी परियोजनाओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।






