Uttar Pradesh

‘पत्थर मॉडल’ पर ब्रेक, अब स्मार्ट फ्लड कंट्रोल के जरिए योगी सरकार का बाढ़ पर प्रहार

नई तकनीक से 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि सुरक्षित, 3 करोड़ लोगों को राहत, ड्रोन-सेंसर निगरानी और नदी डी-सिल्टिंग बनेगी बाढ़ प्रबंधन की नई रणनीति

लखनऊ, 9 मई 2026:

यूपी में बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के पारंपरिक मॉडल में बड़ा बदलाव करते हुए योगी सरकार अब स्मार्ट फ्लड कंट्रोल मॉडल पर जोर दे रही है। सरकार पत्थरों, जियो बैग्स, गैबियन दीवारों और भारी तटबंधों जैसे पुराने और महंगे तरीकों के साथ-साथ अब नदी और नालों की डी-सिल्टिंग यानी गाद निकालने, जलधारा की क्षमता बढ़ाने और तकनीकी निगरानी जैसे उपायों को प्राथमिकता दे रही है।

इससे करोड़ों रुपये की बचत होने के साथ किसानों की जमीनों के बार-बार अधिग्रहण की जरूरत भी कम हो रही है। प्रदेश सरकार के अनुसार नए मॉडल के जरिए अब तक करीब 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को बाढ़ के खतरे से सुरक्षित किया गया है। इससे 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। सरकार अब इस मॉडल को बाढ़ प्रभावित अन्य जिलों में भी विस्तार देने की तैयारी कर रही है।

लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत नदी की गाद निकालकर उसकी जलधारण क्षमता बढ़ाई गई। इस कार्य पर केवल 22 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि पहले इसी क्षेत्र में पारंपरिक बाढ़ नियंत्रण उपायों पर करीब 180 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। इसी तरह बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज और सरयू क्षेत्र में नए मॉडल से महज 5 करोड़ रुपये की लागत आई जबकि पुराने उपायों के तहत यहां 115 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना थी।

बाढ़ नियंत्रण विभाग और इंजीनियरों ने मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में 9 से 16 किलोमीटर तक डी-सिल्टिंग कर जलप्रवाह क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। सरकार का मानना है कि इससे हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण की जरूरत घटेगी और किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।

योगी सरकार के आठ वर्षों में 1,665 से अधिक बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इसके अलावा 60 नदियों की डी-सिल्टिंग और कई नई नहरों का निर्माण भी कराया गया है। वर्ष 2026 में सरकार उच्च जोखिम वाली नदियों और नालों की ड्रोन एवं सेंसर आधारित निगरानी शुरू करने जा रही है। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को बाढ़ प्रबंधन की मुख्य रणनीति बनाया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि स्पुर, जियो बैग्स, पत्थर बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण जैसे खर्चीले कार्यों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जाए। हालांकि पुराने मॉडल को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा लेकिन उनके प्रभावी विकल्प तैयार किए जा रहे हैं।

READ MORE

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button