लखनऊ, 10 मई 2026:
नोएडा समेत देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में आंदोलनकारी मजदूरों पर कथित पुलिसिया दमन के विरोध में रविवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच ऑल इंडिया सेंट्रल काउन्सिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एक्टू) के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने चारबाग रेलवे स्टेशन से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। हालांकि पुलिस ने कुछ ही दूर बैरीकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया।
इसके बाद वहीं प्रतिवाद सभा आयोजित की गई और करीब एक घंटे तक सरकार विरोधी नारे गूंजते रहे। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत एक्टू के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह, डॉ. एसएस जैदी, प्रदेश संगठन मंत्री राणा प्रताप सिंह और प्रदेश सहसचिव देवानन्द के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मजदूरों ने मार्च में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार मजदूरों को रिहा करो, फर्जी मुकदमे वापस लो, चार श्रम कोड खत्म करो, 44 हजार न्यूनतम मजदूरी लागू करो और 8 घंटे का कार्यदिवस बहाल करो जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि आपदा मित्रों, सखियों और सभी स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम मजदूरी दी जाए। सभा के बाद एसीपी विकास जायसवाल को 8 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।

सभा में भाकपा (माले) की राज्य स्थाई समिति के सदस्य रमेश सिंह सेंगर, राज्य कमेटी सदस्य राधेश्याम मौर्य, आइसा नेता शान्तम निधि, नेशनल आपदा मित्र एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक मणि त्रिपाठी, एक्टू के राष्ट्रीय पार्षद चौधरी रामसिंह और किसान महासभा के प्रदेश सह सचिव राजीव कुशवाहा ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी-योगी सरकार संविधान और लोकतंत्र को दरकिनार कर कॉरपोरेट घरानों के हित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग कॉरपोरेट राज और तानाशाही को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जाएगा।
इस प्रदर्शन में सुलेखा, कमला गौतम, प्रमोद कुमार रौनियार, अरविंद यादव, आरवाईए के प्रदेश संयुक्त मंत्री राजीव गुप्ता और एक्टू लखनऊ के जिला मंत्री कुमार मधुसूदन मगन समेत बड़ी संख्या में मजदूर शामिल रहे।






