Unnao City

कार्ड मिला तो चौके लोग…’दिवंगत आत्मा’ के साथ बैठकर पूरे गांव ने खाया तेरहवीं का भोज

संन्यासी का जीवन जी रहे रविन्द्र ने सबको अचरज में डाला, भोज के पीछे दिया तर्क, कहा- मौत के बाद परिवार पर बोझ न पड़े, इस सोच के साथ जीते-जी करवा दी अपनी तेरहवीं

प्रमोद पासी

उन्नाव, 11 मई 2026:

यूपी के उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के पीथनहार गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां 40 वर्षों से संन्यासी जीवन जी रहे रविंद्र प्रसाद ने जीवित रहते हुए अपनी ही तेरहवीं का भोज आयोजित कर दिया। उनका निमंत्रण कार्ड गांव में पहुंचा तो लोग पहले चौंक गए, लेकिन वजह जानने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिचित भोज में शामिल हुए।

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रविंद्र प्रसाद, स्वर्गीय राम दुलारे के पुत्र हैं। उन्होंने 9 मई को अपने नाम से तेरहवीं संस्कार का कार्ड छपवाकर लोगों को प्रीतिभोज के लिए आमंत्रित किया। कार्ड में लिखा गया कि दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रसाद ग्रहण कर उन्हें अनुग्रहित करें।

यह निमंत्रण पढ़कर लोगों को पहले लगा कि उनका निधन हो गया है, लेकिन बाद में पता चला कि रविंद्र प्रसाद पूरी तरह स्वस्थ हैं और यह आयोजन उन्होंने अपनी इच्छा से कराया है। रविंद्र प्रसाद ने बताया कि वह पिछले करीब 40 साल से परिवार से अलग रहकर संन्यासी जीवन बिता रहे हैं।

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उनका कहना है कि उन्होंने जीवन में किसी पर बोझ नहीं बनना चाहा। इसी सोच के चलते उन्होंने तय किया कि मृत्यु के बाद होने वाले संस्कार और भोज की जिम्मेदारी भी किसी और पर न छोड़ी जाए। उन्होंने कहा कि जब जीते-जी अपने लोगों को बुलाकर भोजन कराया जा सकता है, तो मरने के बाद दूसरों पर यह जिम्मेदारी डालने का क्या मतलब है। इसी विचार के साथ उन्होंने रिश्तेदारों, गांव वालों और शुभचिंतकों को आमंत्रित किया और अपनी तेरहवीं का भोज स्वयं कराया। गांव में इस आयोजन की चर्चा पूरे दिन होती रही।

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