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योगी सरकार का ‘हाफ काफिला’ फॉर्मूला… CM ने दिखाई राह, मंत्रियों ने लौटाईं गाड़ियां

वैश्विक तेल संकट की आशंका को देखते हुए पीएम मोदी की ईंधन बचत अपील का यूपी में बड़ा असर, योगी ने अपने काफिले से शुरू की कटौती, मंत्री बोले- राष्ट्रहित में हर त्याग मंजूर

लखनऊ, 14 मई 2026:

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर बढ़ते तेल संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर यूपी में दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अभियान की शुरुआत खुद अपने काफिले से करते हुए सरकारी वाहनों की संख्या में 50 फीसदी कटौती कर दी है। सीएम के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों में भी सरकारी खर्च कम करने की होड़ सी लग गई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने सुरक्षा और सरकारी फ्लीट में शामिल वाहनों की संख्या आधी कर दी। उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री की अपील केवल संदेश नहीं बल्कि राष्ट्रहित का आह्वान है। उसका पालन हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, इसलिए ईंधन बचत के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने भी अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। वहीं कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने अपनी एस्कॉर्ट गाड़ियां वापस कर दी हैं। स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने अब केवल एक एस्कॉर्ट वाहन के साथ चलने का निर्णय लिया है।

सबसे बड़ा संदेश चीनी एवं गन्ना विकास राज्यमंत्री संजय गंगवार ने दिया। उन्होंने अपने पूरे सरकारी फ्लीट को लौटा दिया और अब सिर्फ एक वाहन से चलने का फैसला किया है। इसे सरकार के भीतर सादगी और जवाबदेही के नए संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकारी वाहनों के उपयोग को सीमित करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारियों से कहा कि बिना वरिष्ठ अनुमति के निदेशालय आने से बचें और अधिकतम बैठकें वर्चुअल माध्यम से की जाएं।

ईंधन बचत अभियान का असर विधानसभा तक भी पहुंच गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संसदीय समितियों के अध्ययन भ्रमण कार्यक्रमों को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश जारी कर दिया है। तेल संकट और वैश्विक तनाव के बीच प्रदेश सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक निर्णय के साथ जनता को संयम, सादगी और राष्ट्रहित का संदेश देने की बड़ी राजनीतिक पहल माना जा रहा है।

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