लखनऊ/प्रयागराज, 14 मई 2026:
यूपी में ईको टूरिज्म को नई उड़ान देने की दिशा में योगी सरकार तेजी से काम कर रही है। प्रयागराज के मेजा स्थित कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र में करीब 4.99 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा ईको पार्क तेजी से आकार लेने लगा है। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसे प्रदेश के सबसे आकर्षक प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
यूपी पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा विकसित किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह ईको पार्क न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और छोटे कारोबारों के नए अवसर भी पैदा करेगा।
परियोजना के तहत पर्यटकों की सुविधा और प्राकृतिक वातावरण के संरक्षण दोनों पर विशेष फोकस किया गया है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, इंटरलॉकिंग पार्किंग, आकर्षक साइनेज, बैठने की आधुनिक व्यवस्था, हाईटेक टॉयलेट, कैंटीन ब्लॉक, वॉच टावर, चिल्ड्रन एक्टिविटी एरिया, गार्डन लाइट, सेल्फी प्वाइंट और गजीबो हट जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

इसके अलावा ईको पार्क में बर्ड एक्टिविटी जोन, हॉर्टिकल्चर एवं लैंडस्केपिंग, सिंचाई व्यवस्था, बायो फेंसिंग और चेन लिंक फेंसिंग का कार्य भी कराया जा रहा है। इससे क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रह सके। अधिकारियों के अनुसार कैंटीन, गार्ड रूम और कई प्रमुख निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
सौंदर्यीकरण और गजीबो से जुड़े कुछ कार्य अंतिम चरण में हैं। अक्टूबर 2025 में शुरू हुई इस परियोजना को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक सरकार की ओर से 3.62 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की जा चुकी है। इसमें लगभग 3.50 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ईको पार्क बनने के बाद मेजा क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख ईको टूरिज्म केंद्रों में शामिल हो जाएगा। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और आसपास के इलाकों में होटल, खानपान, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे व्यवसायों को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक योगी सरकार प्रदेश के प्राकृतिक और वन्यजीव क्षेत्रों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मेजा का यह ईको पार्क पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।






