Uttar Pradesh

UP के सरकारी स्कूलों में भी ‘करके सीखो’ मॉडल को बढ़ावा… बच्चे क्लास में करेंगे साइंस के प्रयोग

योगी सरकार ने गांव-गरीब के बच्चों तक पहुंचाई आधुनिक विज्ञान शिक्षा, 38 जिलों में 9,356 साइंस किटों की आपूर्ति, परिषदीय स्कूलों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता विकसित करने की बड़ी पहल

लखनऊ, 16 मई 2026:

यूपी सरकार अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रयोग और अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़ने की शुरुआत तेज कर दी है। प्रदेश के 38 जिलों में 9,356 साइंस किटों की आपूर्ति कर सरकार ने यह संदेश दिया है कि अब गांव और गरीब परिवारों के बच्चों को भी वही आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी। यह अब तक बड़े निजी स्कूलों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित मानी जाती थी।

सरकार की इस पहल के तहत गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किटें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 साइंस किटों की आपूर्ति की गई है। इन किटों के जरिए छात्र अब कक्षा में ही विज्ञान के प्रयोग कर सकेंगे और किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझ पाएंगे।

योगी सरकार पहले ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे अभियानों के माध्यम से सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। अब विज्ञान शिक्षा को भी तकनीक और प्रयोग आधारित बनाने की कोशिश ने इस अभियान को नई गति दे दी है। सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल भवन, नामांकन और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साइंस किटों की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। इससे यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का मानना है कि जब बच्चे खुद प्रयोग करते, मॉडल देखते और गतिविधियों के माध्यम से सीखते हैं तभी विज्ञान उनके लिए रोचक और आसान विषय बनता है। यही वजह है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी ‘करके सीखो’ मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के बच्चों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की नई ऊर्जा पैदा करेगी।

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