न्यूज डेस्क, 18 मई 2026:
देश के सबसे चर्चित नीट यूजी पेपर लीक मामले में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। सोमवार को सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (आरसीसी) के डायरेक्टर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। छात्रों के बीच ‘एम सर’ के नाम से मशहूर मोटेगांवकर पर आरोप है कि वह संगठित पेपर लीक गैंग का सक्रिय सदस्य था। उसने परीक्षा से पहले ही नीट यूजी का प्रश्नपत्र व आंसर की हासिल कर कई लोगों तक पहुंचाई।
सीबीआई के अनुसार रविवार को आरसीसी के मुख्य कार्यालय पर छापेमारी के दौरान मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से लीक हुआ नीट पेपर बरामद हुआ। इसके बाद एजेंसी ने उसे हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का दावा है कि मोटेगांवकर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 23 अप्रैल 2026 को ही प्रश्नपत्र और उत्तर हासिल कर लिए थे जबकि परीक्षा बाद में आयोजित हुई।

सीबीआई ने इससे पहले 15 मई को मोटेगांवकर से उसके घर पर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। इसके अलावा लातूर और पुणे में भी उससे कई दौर की लंबी पूछताछ हो चुकी थी। अब एजेंसी को मिले डिजिटल सबूतों ने पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।
जांच के दौरान सीबीआई ने आरसीसी से जुड़े परिसरों से मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस जब्त किए हैं। इन सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर लीक हुआ पेपर कोचिंग नेटवर्क तक कैसे पहुंचा।क्षजांचकर्ता इस एंगल पर भी काम कर रहे हैं कि क्या एनटीए की गोपनीय परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी अंदरूनी व्यक्ति का संपर्क इस नेटवर्क से था।

सीबीआई की जांच के दायरे में विवेक पाटिल नाम का एक अन्य व्यक्ति भी है जिसके पास कथित तौर पर लीक पेपर पहुंचा था। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट में कितने लोग शामिल थे और कितने छात्रों तक पेपर पहुंचाया गया।
शिवराज मोटेगांवकर ने आरसीसी को महाराष्ट्र का बड़ा कोचिंग ब्रांड बनाया था। लातूर समेत सात जिलों में फैले इसके नेटवर्क में हर साल करीब 40 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं लेकिन अब वही कोचिंग साम्राज्य देश के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक के केंद्र में आ गया है। सीबीआई की कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मचा हुआ है। पेपर लीक केस की जांच में सीबीआई अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।






