लखनऊ, 21 मई 2026:
यूपी सरकार अब उच्च शिक्षा संस्थानों में केवल पढ़ाई के साथ अनुशासन, समानता और सामाजिक समरसता का नया मॉडल लागू करने जा रही है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जल्द ही ड्रेस कोड अनिवार्य किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देशानुसार सभी शिक्षण संस्थानों में यथासंभव एक समान ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी की जा रही है।
सरकार का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में एकरूपता और अनुशासन का माहौल तैयार करना समय की आवश्यकता है। मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि छात्र वर्ग स्वभाव से एक समरूप वर्ग होता है। उनमें किसी प्रकार का ऊंच-नीच, भेदभाव या सामाजिक असमानता दिखाई नहीं देनी चाहिए लेकिन कई बार पहनावे के कारण आर्थिक और सामाजिक अंतर स्पष्ट रूप से नजर आता है। इससे कुछ छात्रों में हीन भावना और कुछ में श्रेष्ठता का भाव पैदा हो जाता है।

उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड लागू होने से इन मानसिक और सामाजिक विभाजनों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। सभी छात्र-छात्राएं समान वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। उनका ध्यान फैशन या दिखावे से हटकर शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और संस्कारित वातावरण की ओर केंद्रित होगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के साथ शिक्षण संस्थानों को सकारात्मक, अनुशासित और सांस्कृतिक मूल्यों से युक्त वातावरण देना भी है। ड्रेस कोड को केवल कपड़ों तक सीमित व्यवस्था नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और समान अवसर की भावना को मजबूत करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बेहतर शैक्षणिक संस्कृति विकसित होगी। इससे विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के लक्ष्य को भी मजबूत आधार मिलेगा। योगी सरकार का यह फैसला अब शिक्षा जगत में नई बहस और नई दिशा दोनों देने वाला माना जा रहा है।






