
लखनऊ, 3 जुलाई 2026:
यूपी में युवाओं को रोजगारपरक, टेक-सेवी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के तहत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटित कर दिया है। इस चरण में 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से एक लाख से अधिक युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के मुताबिक पीएम मोदी के स्किल इंडिया विजन के अनुरूप प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। अब हर प्रशिक्षण बैच में चार घंटे का एआई फॉर ऑल और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल अनिवार्य होगा। इस कोर्स की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है। आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों में प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे की कक्षाएं संचालित होंगी।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी केंद्रों पर मानक के अनुरूप सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इनकी निगरानी मुख्यालय से की जाएगी। हर केंद्र पर प्रतिदिन एक हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र उपलब्ध कराना होगा। नए प्रशिक्षण केंद्रों का उद्घाटन स्थानीय विधायक से कराया जाएगा जबकि केवल एनसीवीईटी एवं एनक्यूआर पोर्टल पर सूचीबद्ध जॉब रोल्स में ही प्रशिक्षण संचालित किया जा सकेगा।
इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में पहली बार कौशल दर्पण एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) द्वारा केंद्रों के सत्यापन के बाद ही 936 संस्थाओं को लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। इनमें 831 निजी, राजकीय और स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 तथा 105 औद्योगिक एवं न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रदेश के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू-एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सभी चयनित संस्थाओं को 1 अगस्त से हर हाल में कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17 चरणों का टाइम-टेबल जारी किया गया है। 70 प्रतिशत या उससे अधिक उपस्थिति वाले प्रशिक्षार्थियों को ही रोजगार मेले में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
परिणाम घोषित होने के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट सुनिश्चित करना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी युवाओं की 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समय पर प्रशिक्षण शुरू न करने या शिकायत मिलने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत संबंधित संस्थाओं के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






