लखनऊ, 30 मई 2026:
यूपी सरकार ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक कॉर्पोरेट जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक बड़ा और अभिनव कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत संचालित सभी आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों के लिए वर्षभर चलने वाली सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया है।
नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण केंद्रों में तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, डिजिटल साक्षरता और रोजगारपरक दक्षताओं को भी व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा। मिशन ने सभी परियोजना क्रियान्वयन संस्थाओं (पीआईए) के लिए इन गतिविधियों का संचालन अनिवार्य कर दिया है। निर्देशों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की भी व्यवस्था की गई है।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल के मुताबिक यह कैलेंडर युवाओं के समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके तहत पूरे वर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों, सांस्कृतिक आयोजनों, खेल प्रतियोगिताओं, उद्यमिता कार्यशालाओं, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों और करियर उन्मुख गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय युवा दिवस और करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों के साथ जनवरी में इसकी शुरुआत होगी। फरवरी में सांस्कृतिक उत्सव और उद्यमिता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। मार्च में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और वार्षिक सम्मान समारोह होंगे। अप्रैल में पृथ्वी दिवस, प्रतिभा खोज प्रतियोगिताएं और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मिशन निदेशक पुलकित खरे के निर्देशन में तैयार इस कैलेंडर में मई माह को योग, खेल और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के लिए समर्पित किया गया है। जून में हेल्थ एंड वेलनेस थीम के तहत स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलेंगे। वहीं जुलाई में मॉक इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन और पब्लिक स्पीकिंग प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया जाएगा। अगस्त से दिसंबर तक स्वतंत्रता दिवस, हिंदी दिवस, साइबर सुरक्षा कार्यशालाएं, संविधान दिवस, डिजिटल साक्षरता अभियान और रिज्यूमे लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी।
इस पहल की सबसे खास विशेषता सभी आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों में छह विशेष क्लबों का गठन है। इनमें सांस्कृतिक क्लब, खेल एवं फिटनेस क्लब, डिजिटल एवं आईटी क्लब, साहित्य एवं भाषा क्लब, पर्यावरण एवं सामाजिक जागरूकता क्लब तथा उद्यमिता एवं करियर विकास क्लब शामिल होंगे। हर क्लब में कम से कम पांच प्रशिक्षार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिनमें दो महिला प्रशिक्षार्थियों का होना अनिवार्य रहेगा। साथ ही दिव्यांग प्रशिक्षार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मिशन ने हर गतिविधि की जियोटैग फोटो, उपस्थिति विवरण और प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। मिशन निदेशक का कहना है कि यह पहल ग्रामीण युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल भी विकसित करेगी। इससे वे कॉर्पोरेट जगत की प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का सामना कर बेहतर रोजगार अवसर हासिल कर सकेंगे।






